सरसींवा से बिलासपुर ले जा रही मरीज की रास्ते में हुई मौत, 108 ने वापस ले जाने से किया इंकार, पामगढ़ के इस डॉक्टर ने दिखाई दरियादिली

JJohar36garh News(Basant Khare)|कभी-कभी नियम कायदा के सामने मानवता भी शर्मसार हो जाती है, इंसान चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाता, बुधवार को दोपहर को ऐसा ही मंजर पामगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिला| सरसींवा में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई युवती को 108 बिलासपुर सिम्स लेकर जा रही थी| 108 पामगढ़ से कुछ दूर निकली थी की युवती की सांसे थम गई| 108 के चालक और एमटी ने पुस्टि के लिए पामगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे| जहां डॉक्टर ने जाँच उपरान्त युवती को मृत घोषित कर दिया|

युवती के साथ उसकी सुधबुध खो बैठी माँ और नाबालिक छोटा भाई था| नियमों के अनुसार 108 वाहन के कर्मचारियों को युवती के शव को वापस ले जाने की अनुमति नहीं थी, जबकि 108 को वापस सरसींवा ही जाना था लिहाज़ा शव को पामगढ़ में ही छोड़ना पड़ा| रोती बिलखती माँ और नाबालिक भाई के चेहरे से बेबसी साफ झलक रही थी | उनके पास ना तो पैसे थे और न ही पामगढ़ में कोई जान पहचान था | घर का गुजारा भी इसी बहन के वेतन से चलता था | घर में भी बूढ़े बाप के अलावा और कोई नहीं था | दोनों की हालत देख कर मौजूद सभी लोगों का दिल पसीज गया | लेकिन नियमों के आगे कोई कुछ नहीं कर पा रहा था |

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डॉक्टर ने की 108 के उच्च अधिकारी से फरियाद

नियमों की जानकारी होने के बाद भी दोनों के हालात को देखकर वहां मौजूद डॉक्टर हेमंत लहरे ने 108 के चालक के माध्यम से उनके उच्च अधिकारी से भी गुहार लगाई | क्योंकि 108 आख़िरकार वापस सरसींवा ही जा रही थी| अगर वे बिलाईगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक भी पहुंच जाते तो उनके लिए बहुत मदद हो जाती क्योंकि वे घर के करीब होते | लेकिन बात नहीं बनी|

पोस्टमार्डम व अन्य कार्यवाही में लग जाता समय

मृतिका का घर पामगढ़ से लगभग 65-70 किलो मीटर दूर था,  पोस्टमार्डम और अन्य कागजी कार्यवाही में काफी समय लग जाता, जिससे यही रात हो जाती, शव को घर ले जाने में दोनों को और भी परेशानी हो जाती| जिससे कारण वे बिलाईगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना चाहते थे, जहां उनका घर थोड़ा पास पड़ता और मदद के लिए गांव से भी आसानी से लोग पहुंच जाते | इसलिए मृतिका का भाई राजेंद्र साहू 108 के चालक और एमडी से वहां तक छोड़ने की गुहार लगा रहा था |

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शव को छोड़ना नहीं चाहते थे 108 के कर्मचारी

शव से चिपकी बिलखती माँ और मासूम के हालत को देखकर 108 के चालक और एमडी उसे इस हाल में पामगढ़ में छोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन नियमो के आगे वह भी मजबूर थे| उन्होंने अपने उच्च अधिकारी को फ़ोन बात भी की, लेकिन बात नहीं बनी|  दोनों के चेहरे से मानवता भी साफ झलक रही थी |

डॉक्टर हेमंत लहरे ने ब्यवस्था की प्राइवेट एम्बुलेंस

डॉक्टर हेमंत लहरे को जब उनके परेशानी के बारे में पता चला तो वह मृतिका की माँ और उसके भाई से बातचीत, जब उन्होंने प्राइवेट एम्बुलेंस करने में असमर्थता जताई | और यहां पोस्टमार्डम नहीं कराने की बात कहते हुए अपनी अन्य परेशानी बताई तो डॉक्टर ने अपने खर्चे से तत्काल प्राइवेट एम्बुलेंस की ब्यवस्था की | और शव को उनके कहे अनुसार बिलाईगढ़ के लिए रवाना किया गया |

युवती दुकान में करती थी काम

मृतिका पूर्णिमा साहू सरसींवा के एक दुकान में काम करती थी, हमेशा तरह घर से काम के लिए निकली थी और रास्ते में उसे ट्रक ने अपनी चपेट में ले लिया | मृतिका की माँ ने बताया उसके दो ही बच्चे हैं, बेटी ही घर की मुखिया थी | बेटी के वेतन से घर चलाने में मदद मिल जाती थी |

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