मड़वा पावर प्लांट उपद्रव : 1 घटना की 5 अलग-अलग FIR, हाईकोर्ट ने शासन को भेजा नोटिस

JJohar36garh News|जांजगीर के मड़वा पावर प्लांट में हुए उपद्रव में 5-5 अलग-अलग एफआईआर दर्ज़ हुई है, जिसे लेकर हाईकोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दर्ज 5 अलग-अलग FIR को संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन बताते हुए पुलिस ने प्लांट में हुए उपद्रव को लेकर 500 लोगों पर FIR दर्ज की थी। इसमें से 19 लोग करीब 80 दिन से जेल में हैं, जबकि बाकी पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है।

दरअसल, पूरे मामले में प्लांट के भूविस्थापितों ने अधिवक्ता सुमित सिंह के माध्यम से याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुमित सिंह ने दलील दी कि भूमि अधिग्रहण के बावजूद स्थाई नौकरी नहीं देने को लेकर प्लांट के बाहर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ गई थी। इस घटना के लिए विभिन्न धाराओं के तहत 5 अलग-अलग अपराध जांजगीर थाने में दर्ज किए गए हैं।

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अधिवक्ता सुमित सिंह ने कहा कि इसके अनुसार याचिकाकर्ताओं को पुलिस 5- बार गिरफ्तारी, जांच और ट्रायल करना चाहती है। यह असंवैधानिक है। जबकि घटनाक्रम एक ही है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को अलग-अलग और व्यक्तिगत रूप से 5 मुकदमों का सामना करने के लिए मजबूर करना न्यायोचित नही है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने शासन को दिए नोटिस में पूछा है कि आपको किन परिस्थितियों में 5 FIR दर्ज करनी पड़ी। किन परिस्थितियों में आपको यह जानकारी हुई है कि घटना स्थल पर 500 लोग मौजूद थे, उससे कम या ज्यादा नहीं। जस्टिस गौतम भादुड़ी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भूविस्थापितों के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें स्टे दिया है। यह भी कहा है कि अन्य एफआईआर को छोड़ कर अपराध क्रमांक 5 में ही जांच किया जाना उचित है।

आंदोलनकारियों ने 1 जनवरी से प्लांट के सामने प्रदर्शन शुरू किया था। प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल हैं। इस बीच रविवार को प्रशासनिक अधिकारी और आंदोलनकारियों के बीच में बातचीत होनी थी। पहले राउंड की बातचीत हुई भी थी, पर विफल रही। इसके बाद शाम 5 बजे से सीनियर अधिकारियों के साथ आंदोलनकारियों की बातचीत होनी थी। आंदोलनकारियों का 10 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल अंदर भी जा चुका था। इससे पहले ही बवाल हो गया।

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प्लांट के लिए 2008 में जमीन अधिग्रहण शुरू हुआ। 2015-16 से यहां एक हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है। उस दौरान मड़वा, तेंदूभांठा के लोगों को वादा किया गया था कि उन्हें यहां नौकरी दी जाएगी। जिसके बाद बहुत से लोगों को काम पर भी रखा गया। करीब 400 लोग ऐसे थे, जिन्हें संविदा नियुक्ति दी गई और उन्हें अलग-अलग जिलों में नियुक्ति दी गई। कई ऐसे भी ग्रामीण हैं, जिनका कहना है कि उनकी जमीन ले ली गई, लेकिन नौकरी नहीं दी गई। नौकरी देने और स्थायी करने की मांग को लेकर ग्रामीण 6 दिसंबर से जांजगीर के कचहरी चौक में प्रदर्शन कर रहे थे।