परिजनों ने जबरन कराई शादी, 23 दिन बाद प्रेमिका के साथ फांसी पर झूलाता मिला युवक

अमरोहा के गजरौला में परिजनों ने युवक की अपनी मर्जी से शादी करवा दी। उसने 23 दिन बाद प्रेमिका के साथ खेत में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

अमरोहा में परिजनों ने अपनी मर्जी से युवक की शादी कराई तो 23 दिन बाद ही उसने प्रेमिका के साथ फांसी पर झूलकर आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बताया जा रहा है कि युवक का युवती संग प्रेम-प्रसंग चल रहा था। जिले के गांव मोहम्मदपुर सुल्तान ठेर निवासी 21 वर्षीय जीतपाल पुत्र विशंभर की शादी बीती 27 अप्रैल को गढ़मुक्तेश्वर थाना क्षेत्र के नया गांव निवासी कुसुम के साथ हुई थी।

बताया जाता है कि जीतपाल के अपने ही कुनबे की 18 वर्षीय चंद्रवती से प्रेम संबंध थे। जीतपाल की शादी से न तो वह खुद ही खुश था और न ही चंद्रवती। गुरुवार रात जीतपाल के चचेरे साले का मंढ़ा था। जीतपाल पत्नी के साथ ससुराल गया था। बताते हैं कि जीतपाल वहां से रात करीब 11:30 बजे बाइक से अपने गांव आ गया। यहां चंद्रवती को साथ लेकर वह अपने खेत पर पहुंचा। वहां दोनों ने पेड़ पर दुपट्टे से फांसी का फंदा बनाया और उस पर झूल गए। 

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शुक्रवार सुबह ग्रामीण खेतों पर गए तो दोनों के शवों को देख घटना की जानकारी हुई। मौके पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रभारी निरीक्षक राजेश तिवारी ने बताया कि प्रेम-प्रसंग के चलते दोनों ने आत्महत्या की है। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। जांच की जा रही है।

फोन पर की बात और कर लिया आत्महत्या का फैसला

जीतपाल की शादी के बाद से ही चंद्रवती व जीतपाल के बीच फोन पर रोजाना अनबन होती थी। बताया जाता है कि गुरुवार रात भी दोनों के बीच फोन पर झगड़ा हुआ था। इसके बाद दोनों ने साथ में आत्महत्या करने का फैसला कर लिया। जीतपाल रात में ही अपनी ससुराल से बाइक लेकर सीधा चंद्रवती के घर के पास पहुंचा। चंद्रवती ने अपने घर से दो दुपट्टे लिए और उसकी बाइक पर बैठकर खेत पर चली गई। वहां जाकर दोनों ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

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चंद्रवती ने ठुकरा दिया था रिश्ता

जीतपाल व चंद्रवती की प्रेम कहानी दोनों के परिजनों को भी पता लग गई थी। एक ही गांव व कुनबे से जुड़ा होने के कारण परिजनों ने उनकी शादी करवाने से मना कर दिया था। इस बीच जीतपाल की शादी से पहले चंद्रवती के परिवार ने उसकी शादी किसी दूसरे युवक के साथ तय की लेकिन चंद्रवती ने उस रिश्ते को ठुकराते हुए शादी करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद जीतपाल के परिवार ने उसकी शादी कर दी।

साथ जीने-मरने की कसम याद दिलाती थी चंद्रवती

जीतपाल और चंद्रवती ने साथ जीने-मरने की कसम खाई थी। जीतपाल की शादी के बाद चंद्रवती उसे साथ जीने-मरने की कसम बार-बार याद दिलाती थी। खुद जीतपाल ने इस बाबत अपनी मां सुखिया को भी बताया था। इस प्रेम कहानी का दुखद अंत भी दोनों की एक साथ मौत के बाद ही हुआ।