मधुमक्खी पालन : कुछ ही सालों में कोई भी उद्यमी बन सकता लखपति

मधुमक्खी पालन देश में एक बड़े स्वरोजगार के रूप में उभरा है. कई राज्यों के किसान परंपरागत खेती छोड़कर मधुमक्खी पालन में उतर गए हैं. इससे उन्हें कमाई तो ही रही है, सरकार भी कई तरह की मदद करती है. मधुमक्खी पालन सूक्ष्म व्यवसाय और बड़े व्यापार की तरह से किया जाता है. मधुमक्खी पालने और शहद प्रसंस्करण इकाई (हनी प्रोसेसिंग यूनिट) लगाकर प्रोसेसिंग प्लांट की मदद से मधुमक्खी पावन के बाजार में कामयाबी हासिल की जा सकती है.

अगर बड़े स्तर पर मधुमक्खी पालन किया जाए तो कुछ ही सालों में कोई भी उद्यमी लखपति बन सकता है. इसके लिए उसे प्रकृति से प्यार, काम के प्रति समर्पण और धैर्य रखना होता है. सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं जिसमें ऋण व्यवस्था प्रमुख है. इस व्यवसाय के लिए 2 से 5 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध है, चूंकि यह उद्योग लघु उद्योग श्रेणी के अंतर्गत आता है, इसलिए सरकार का इस पर और ज्यादा ध्यान है.

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कैसे करें कमाई

आप अगर चाहें तो 10 बॉक्स लेकर भी मधुमक्खी पालन कर सकते हैं. अगर 40 किलोग्राम प्रति बॉक्स शहद मिले तो कुल शहद 400 किलो मिलेगा. 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 400 किलो बेचने पर 1 लाख 40 हजार रुपये की कमाई होगी. यदि प्रति बॉक्स खर्च 3500 रुपये आता है तो कुल खर्च 35 हजार रुपये होगा और शुद्ध लाभ 1,05,000 रुपये होगा. यह व्यापार हर साल मधुमक्खियों की संख्या के बढ़ने के साथ 3 गुना अधिक बढ़ जाता है. अर्थात 10 पेटी से शुरू किया गया व्यापार 1 साल में 25 से 30 पेटी भी हो सकता है.

अगर आप बड़े स्तर पर मधुमक्खी पालन करना चाहते हैं तो 100 बॉक्स लेकर यह काम शुरू कर सकते हैं. अगर 40 किलो प्रति बॉक्स शहद मिले तो कुल शहद 4 हजार किलोग्राम होगा. 350 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से 400 किलो शहद बेचने पर 14 लाख रुपये प्राप्त होगा. प्रति बॉक्स खर्च 3500 रुपये आता है तो कुल खर्च 3,40,000 रुपये होगा. खुदरा और अन्य खर्च 1,75,000 (मजदूर, यात्रा आदि) रुपये होगा. इसलिए शुद्ध लाभ 10,15,000 रुपये होगा.

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मधुमक्खी पालन का अर्थशास्त्र उसके स्तर पर निर्भर करता है. एक डिब्बे मधुमक्खी से प्राप्त होने वाले 50 किलो कच्चा शहद को अक्सर 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है. इसलिए प्रत्येक डिब्बे से आपको 5 हजार रुपये प्राप्त होते हैं. बड़े पैमाने पर इस व्यापार को करने से प्रति महीने 1 लाख 15 हजार रुपये तक का लाभ हो सकता है. बड़े पैमाने पर व्यापार के लिए तैयार किए गए मधु का मूल्य औसतन 250 रुपये प्रति किलो के आसपास होता है. बाजार में पुराने शहद की मांग काफी रहती है जो बहुत ही कम मिलता है.

जैविक शहद अच्छे दाम पर बाजार में बिकता है. 1 किलोग्राम आर्गेनिक हनी का दाम 400 से 700 रुपये तक हो सकता है. यदि यह व्यापार बड़े पैमाने पर करना है यानी प्रति वर्ष 20 हजार किलो शहद बनाना है तो इसकी कुल लागत 24 लाख 50 रुपये आती है और इसमें लाभ भी बहुत होता है. 50 डिब्बे वाली इकाई पर करीब 2 लाख रुपये तक का खर्च आता है.

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सरकार से मदद

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सरकार हनी प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना में मदद करती है. इस प्लांट की स्थापना के लिए कुल लागत का 65 फीसद हिस्सा कर्ज के तौर पर दिया जाता है. इस कर्ज के अलावा सरकार की तरफ से 25 फीसद की सब्सिडी भी प्राप्त होती है. इस तरह से उद्यमी को कुल लागत का केवल 10 परसेंट ही अपने पास से लगाना होता है. यदि कुल लागत 24 लाख 50 हजार की आती है, तो लगभग 16 लाख रुपये ऋण के तौर पर मिल जाएगा और मार्जिन राशि के रूप में उद्यमी को कुल 6 लाख रुपये मिल जाते हैं. इस तरह से व्यापार में उद्यमी को अपने पास से केवल 2 लाख रुपये ही लगाने की जरूरत होती है. (Agency)