कछुआ बना सकता है आपकी किस्मत मालामाल, सही दिशा और धातु का रखें खास ध्यान

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में कछुए को बहुत ही शुभ और पवित्र माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार यानी कि कछुए का रूप धारण कर समुद्र मंथन में मदद की थी। यही वजह है कि कछुए को साक्षात लक्ष्मी का प्रतीक और सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। आजकल कुछ लोग घर की सजावट या वास्तु दोष दूर करने के लिए कछुआ रखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा या गलत धातु का कछुआ आपके भाग्य को चमकाने के बजाय बिगाड़ भी सकता है? आइए जानते हैं कछुआ रखने के नियम, जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।

सही धातु का चुनाव है जरूरी
    पीतल या चांदी – अगर आप संतान सुख या करियर में उन्नति चाहते हैं, तो पीतल या चांदी का कछुआ रख सकते हैं।
    क्रिस्टल या कांच का कछुआ – धन लाभ और आर्थिक तंगी दूर करने के लिए दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में क्रिस्टल का कछुआ रख सकते हैं।
    मिट्टी का कछुआ – जीवन में स्थिरता और शांति के लिए मिट्टी का कछुआ पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रख सकते हैं।

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दिशा का रखें विशेष ध्यान
    उत्तम दिशा – कछुआ रखने के लिए सबसे उत्तम दिशा उत्तर मानी गई है। उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की है, इसलिए यहां कछुआ रखने से धन में वृद्धि होती है।
    अंदर की ओर मुख – कछुए का मुख हमेशा घर के मुख्य द्वार से अंदर की ओर होना चाहिए। अगर इसका मुख बाहर की तरफ होगा, तो घर की लक्ष्मी और बरकत बाहर चली जाएगी।
    पानी का पात्र – कछुए को हमेशा कांच या धातु के किसी ऐसे बर्तन में रखें जिसमें थोड़ा पानी भरा हो। सूखा कछुआ रखना वास्तु के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता।

भूलकर भी न करें ये गलतियां
    बेडरूम में न रखें – कछुआ एक सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक है, इसे बेडरूम में रखने से मानसिक तनाव हो सकता है। इसे लिविंग रूम या पूजा घर में रखना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अलावा किचन में भी कछुआ रखने से बचना चाहिए।
    जोड़े में न रखें – घर में हमेशा एक ही कछुआ रखना चाहिए। दो या दो से अधिक कछुए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कम हो सकता है।
    साफ-सफाई – कछुए के पात्र का पानी नियमित रूप से बदलते रहें। गंदा पानी नकारात्मकता को आकर्षित करता है।

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