छत्तीसगढ़ में बलौदाबाजार आगजनी की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई है और एक बार फिर सतनामी समाज की आस्था पर हमला हुआ है, इस बार समाज के पवित्र जैत खाम को जलाने की कोशिश की गई है| घटना के बाद से सतनामी समाज में आक्रोश ब्याप्त है| घटना के बाद शासन प्रशासन ने गाँव को छावनी में तब्दील कर दिया है| साथ ही जल्द से जल्द आरोपी को पड़ने की बात कर रही है| लेकिन घटना के बाद से शासन की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे है| घटना लोरमी के ग्राम पंचायत झझपुरी की है |
दरअसल लोरमी तहसील के झझपुरी क्षेत्र में सतनामी समाज की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जानकारी के अनुसार 16 जनवरी को समाज के पवित्र जैत खाम को अज्ञात तत्वों द्वारा जलाए जाने की कोशिश की गई है, जिससे समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक बार पवित्र जैत खाम को खंडित किया जा चुका है, लेकिन उस समय दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की वजह से आरोपियों के होसले बुंलद है | जिसके कारण दूसरी बार आरोपी बिना खोफ के घटना को अंजाम दिए है | जिससे समाज में नाराजगी बनी हुई थी। समाज के लोगों ने घटना को सुनियोजित साजिश बताते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सतनामी समाज के प्रतिनिधि जितेन्द्र बंजारा का कहना है की घटना 16 जनवरी की रात की है | इसके 3 दिन पूर्व यहाँ जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया था | जिसमें उप मुख्यमंत्री अरुण साव शामिल हुए थे | इसके बाद भी जैतखाम को जलाया गया | इससे स्पष्ट है की उन्हें कानून या शासन का कोई डर नहीं है | उन्होंने यहाँ तक कह दिया की आरोपियों को संरक्षण मिला हुआ है | जिसके कारण आरोपी बेखौफ होकर घटना को अंजाम दिए है| वे लोग समाज को उकसाने और भड़काने का काम कर रहे है | उन्होंने अन्य राजनीतिक दल और सामाजिक दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा की जो जयंती कार्यक्रम में हितैसी बनते हैं वो दुःख की घड़ी में सामने क्यों नही आते| फ़िलहाल घटना को लेकर सतनामी समाज में काफी आक्रोश है|
नए जैतखाम की स्थापना शुरू
लोरमी के झझपुरी गांव में हुए जैतखाम अग्निकांड मामले के बाद अब हालात सामान्य करने की दिशा में प्रशासन और समाज की संयुक्त पहल की गई | सतनामी समाज के प्रमुखों और प्रशासन के बीच सहमति बनने के लिए कई स्तर पर वार्ता हुई | जिसके बाद नए जैतखाम और जल्द से जल्द आरोपी को पड़ने और कड़ी से कड़ी कार्यवाही की बाद पर सहमती बनी | जिसके बाद गांव में नए जैतखाम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है|
सहमति के तुरंत बाद प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दीं। समाज की ओर से विधि-विधान के साथ जैतखाम स्थापना की प्रक्रिया शुरू की गई। सबसे पहले जैतखाम के लिए लाई गई लकड़ी का विधिवत पूजन किया गया, जिसके बाद उसे स्वरूप देने का कार्य प्रारंभ हुआ। जैतखाम स्थल और पूरे गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जैतखाम के आसपास चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही गांव के सभी प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है, जहां आने-जाने वालों की जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

शनिवार सुबह से ही मामले के संज्ञान में आने के बाद एसडीएम और एसडीओपी गांव में डेरा डाले हुए हैं। प्रशासन की ओर से लगातार शांति बनाए रखने की अपील भी की जा रही है। जैतखाम को आग लगाने के मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। आरोपी की तलाश के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और साइबर टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने मामले पर कहा कि यह सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को आरोपी को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए हैं। साथ ही समाज प्रमुखों से लगातार बातचीत जारी होने की बात कही। डिप्टी सीएम ने कहा कि मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि किसी भी तरह की अफवाहों में न आएं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सख्त सजा दिलाई जाएगी।