CG : भाजपा की महिला पार्षद ने खाया जहर, गंभीर हालत में भर्ती, अंदरूनी राजनीति और संघर्ष की बात आ रही सामने

रायगढ़ नगर निगम की राजनीति में आज एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। वार्ड क्रमांक 2 की सक्रिय भाजपा पार्षद नेहा देवांगन ने अचानक जहर सेवन कर आत्मघाती कदम उठाया। इस खबर ने राजनीतिक गलियारों और आम जनता में खलबली मचा दी है। शहर की एक उभरती महिला नेत्री के इस कदम ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह मानसिक तनाव का परिणाम था या नगर निगम की अंदरूनी राजनीति और संघर्ष की वजह से ऐसा हुआ।

 

सूचना मिलते ही जिला अस्पताल में महापौर, नगर निगम सभापति और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तुरंत पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि पार्षद की हालत अब सामान्य है। डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही है और उन्हें खतरे से बाहर बताया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेहा देवांगन पर संभावित मानसिक और राजनीतिक दबाव रहा होगा। भाजपा के स्थानीय नेताओं और नगर निगम के अंदरूनी हालात के कारण पार्षद को मानसिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा हो सकता है। हालांकि अभी तक किसी पक्ष ने इस घटना पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

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पुलिस को घटना की सूचना दी जा चुकी है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने अस्पताल के आसपास और पार्षद के निवास स्थान का निरीक्षण भी किया। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि पार्षद ने जहर क्यों सेवन किया और क्या उनके पास कोई खतरे या धमकी का संकेत था। राज्य और जिले की राजनीति में यह घटना हलचल का विषय बन गई है। शहरवासियों में भी इस घटना को लेकर भारी चिंता है। स्थानीय सामाजिक संगठन और नागरिक भी पार्षद के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति के प्रति संवेदनशील दिख रहे हैं।

 

 

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि नेहा देवांगन की हालत स्थिर है और उन्हें अब धीरे-धीरे सामान्य देखभाल प्रदान की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि भावनात्मक और मानसिक सहारा इस समय उनकी रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। विपक्षी दल इसे नगर निगम में सत्ता और दबाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, किसी भी दल ने इस मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। फिलहाल, पूरे जिले में सवाल यह है कि नेहा देवांगन को इस कदम के लिए मजबूर करने वाली परिस्थितियां क्या थीं। जनता और नेता दोनों ही उनके बयान का इंतजार कर रहे हैं। यह घटना रायगढ़ नगर निगम में महिला नेताओं की भूमिका और उनके ऊपर पड़े दबाव की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। भविष्य में पार्षद और प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले बयान इस पूरे मामले की असली सच्चाई उजागर करेंगे।

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