बेटे को इमरजेंसी में रख पिता को कर रहा था ब्लैकमेल

महासमुंद जिले के एक निजी और नामी अस्प्ताल के एक डॉक्टर ने 20 हजार रुपये के लिए मानवता के सारे हदों को पार कर दिया, पैसे नहीं देने के कारण मरीज का ईलाज सही ठंग से नहीं किया गया और ना ही ऑपरेशन के बाद उसका टांका खोला गया. जिसके मरीज को उसके पिता ने एम्स ले जाकर उसका सही ईलाज करवाया. और स्वास्थ एवं परिवार कल्याण विभाग से इसकी शिकायत की.

शिकायतकर्ता ने बताया है कि उसके बच्चे के गाल में सूजन के आने के कारण महासमुंद जिले के एक निजी अस्प्ताल में उसे भर्ती करवाया गया था. जिसके बाद अगले दिन उसे आयुष्मान भारत के तहत आफिस में बुलाकर 20 हजार रु मांग किया गया. जिसके बाद उसके अगले दिन बच्चे को बुखार आने के कारण उसका ऑपरेशन नहीं किया गया. और जब बच्चे का ऑपरेशन किया गया तो उसे 8 घंटो तक एमरजेंसी में रखकर लगातार डाक्टर द्वारा मरीज के पिता (शिकायतकर्ता) से 20 हजार रुपयों के लिए प्रताड़ित कर मांग किया जाने लगा. जिसके बाद मरीज ने 5 हजार रुपये डॉक्टर को दिए लेकिन उसके बदले उसे कोई भी बिल नहीं दिया गया और लगातार उस मरीज को लेकर वहां के डॉक्टर ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी.

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इस प्रताड़ना से परेशान होकर जब पीड़ित ने डायल 104 पर फोन करके शिकायत करने की बात कही तो निजी अस्पताल के महिला कर्मचारियों ने शिकायत करने को मना कर उसे डिस्चार्ज पेपर दे देंगे बोला गया और एक कोरे कागज में दस्तख़त करवा कर पीड़ित के बच्चे को वहां से डिस्चार्ज दिया गया.

निजी अस्पताल द्वारा मरीज के लिए 5 दिन के मेडिसिन दिया गया था, और उसका टंका खुलवाने हेतु उसे वापस बुलाया गया था. जहां अस्प्ताल के डॉक्टर ने मरीज के पिता को अभद्र व्यवहार करते हुए बहोत शिकायत करने वाले हो गए हो बोलकर तुम्हारे बेटे को अब यहां भर्ती नही करवाएँगे बोला गया. और उस अस्प्ताल से भगवान का दर्जा देने वाले डॉक्टर ने 20 हजार पैसे नही मिलने के कारण बच्चे का टांका ना खोलकर उसे वापस भेज दिया.

जिसके बाद बच्चे के पिता ने उसे रायपुर के एम्स अस्पताल में ईलाज के लिए ले गया. जहाँ उसे पता चला कि पूर्व में हुआ ऑपरेशन भी सही तरीके से नहीं हुआ था जिसे के बार फिर भर्ती कराकर सही तरीके से नि:शुल्क वहां ईलाज कराया गया. (cgsandesh.com)

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