रेबीज़ से भैस की मौत : गुजरात के भरूच जिले से हैरान करने वाली घटना सामने आई है. यहां एक भैंस को कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद भैंस को रेबीज हो गया और उसकी मौत हो गई. भैंस के मारने के बाद भैंस का दूध इस्तेमाल करने वाले परिवार में डर का माहौल है. इन सभी लोगों को डर है कि कहीं उन्हें भी रेबीज न हो जाए. डर के मारे ये सभी टीका लगवाने के लिए अस्पताल पहुंचे हैं.
रेबीज़ से भैस की मौत : मामला भरूच जिले के जंबूसर का है. यहां रेबीज से संक्रमित भैंस का दूध पीने के बाद करीब 35 लोग डर के मारे रेबीज का टीका लगवाने अस्पताल पहुंचे. मामले में भैंस को एक पागल कुत्ते ने काटा था, जिससे उसकी रेबीज के कारण मौत हुई थी.
रेबीज़ से भैस की मौत, लोगों ने लगावाया टीक
इसके बाद जब भैंस का दूध पीने वाले लोगों को पता चला कि भैंस को रेबीज हो गया है, तो लोग टीका लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए. अब तक लोगों को कुत्ते के काटने के बाद रेबीज का टीका लगवाते देखा है, लेकिन जंबूसर में भैंस का दूध पीने के बाद रेबीज का टीका लगवाने की होड़ मच गई है. इस मामले में भी बूस्टर खुराक दी गई है.
रेबीज़ से भैस की मौत, क्या कहती है रिपोर्ट
हालांकि, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) की एक रिपोर्ट और कुछ हालिया मामलों के अनुसार, सैद्धांतिक रूप से यह जोखिम हो सकता है कि यदि संक्रमित गाय या भैंस का दूध बिना उबाले (कच्चा) पिया जाए तो रेबीज का वायरस फैल सकता है, हालांकि यह एक दुर्लभ घटना है. यही कारण है कि एहतियात के तौर पर 35 लोगों को टीका दिया गया है, क्योंकि रेबीज एक घातक बीमारी है जिसके लक्षण दिखने के बाद इलाज लगभग असंभव होता है.
जहां तक रेबीज के टीके के दुष्प्रभाव की बात है, यदि किसी व्यक्ति को रेबीज होने का जोखिम न हो, तो भी टीके के दुष्प्रभाव आमतौर पर नहीं होते हैं. रेबीज का टीका मृत वायरस से बनाया जाता है, इसलिए यह बीमारी पैदा नहीं कर सकता. हालांकि, डॉक्टर आमतौर पर बिना किसी जोखिम के टीका लगाने की सलाह नहीं देते.
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