सीडीएस बोले: ऑपरेशन सिंदूर जारी, शांति के पक्षधर पर युद्ध के लिए भी तैयार तीनों सेना प्रमुख

महू 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार सेना का रण संवाद-2025 कार्यक्रम मंगलवार से महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में शुरू हुआ। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे। इनमें से अधिकांश पर अमल चल रहा है और कुछ को लागू भी कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अब भी जारी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार शाम को महू पहुंचेंगे।

जनरल अनिल चौहान ने भारत की रक्षा क्षमताओं के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बात। उन्होंने कहा, 'दो-तीन दिन पहले, आपने सुना होगा कि DRDO ने एक विशेष एकीकृत प्रणाली का परीक्षण किया, जिसमें QRSAM, VSHORADS और 5-किलोवाट लेजर को इंटीग्रेट किया गया।' जनरल चौहान ने आगे कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मल्टी-डोमेन लेवल पर तैयार रहना होगा। जैसे- इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस के स्तर पर समन्वय की जरूरत है। इसके अलावा संघर्ष की स्थिति में जल, थल, नभ के अलावा समुद्र के भीतर और स्पेस में भी तैयारी की जरूरत है। इसके अलावा इन सभी क्षेत्रों में समन्वय भी जरूरी है।

See also  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 7 दिनों तक फ्री सफारी, 17-23 दिसंबर तक ज्वालामुखी गेट से एंट्री मुफ्त

गीता और महाभारत से युद्ध नीति की सीख
सीडीएस ने कहा कि गीता और महाभारत युद्ध नीति के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। चाणक्य की नीति ने चंद्रगुप्त मौर्य को विजय दिलाई। कौटिल्य और चाणक्य ने शक्ति, उत्साह और युक्ति को युद्ध नीति का मूल तत्व बताया है। उन्होंने जोर दिया कि शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन आवश्यक है।

“हम शांति चाहते हैं, पर शांतिवादी नहीं हो सकते”
सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और यह एक शांतिप्रिय राष्ट्र है। लेकिन किसी भ्रम में न रहें, हम शांतिवादी नहीं हो सकते। उन्होंने उद्धरण देते हुए कहा – “यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें।” उन्होंने ‘युद्ध पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र किसी सीमा को नहीं पहचानेंगे। इसलिए सभी सेनाओं को मिलकर त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। उन्होंने एआई, साइबर और क्वांटम तकनीक को संयुक्त प्रशिक्षण के साथ जोड़ने पर बल दिया और कहा कि संयुक्त कौशल ही भारत के सैन्य परिवर्तन की नींव है।

See also  गेहूं का MSP 2585 रुपये तय, आष्टा मंडी में रबी सीजन की नीलामी शुरू

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कंप्यूटेशन, डेटा एनालिटिक्स, बिग डेटा, LLM (लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स) और क्वांटम टेक्नोलॉजीज के उपयोग को अनिवार्य बताया। जनरल चौहान ने कहा, 'भारत जैसे विशाल देश के लिए इस स्तर की परियोजना में पूरे राष्ट्र की भागीदारी जरूरी होगी। लेकिन हमेशा की तरह, मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय इसे न्यूनतम और बहुत किफायती लागत पर कर लेंगे।'

रण संवाद 2025 में तीन संयुक्त सैन्य सिद्धांत—मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, स्पेशल फोर्सेस ऑपरेशंस और एयरबोर्न व हेलिबोर्न ऑपरेशंस जारी किए गए। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को होना है।

वाइस एडमिरल बोले – तकनीक बनी निर्णायक कारक
नौसेना के वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने कहा कि ड्रोन, आईएसआर, साइबर ऑपरेशन और सूचना युद्ध जैसे साधन यूक्रेन और गाजा संघर्ष में निर्णायक कारक रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल तकनीक को और अधिक एडवांस बनाने की जरूरत बताई।

See also  मध्यप्रदेश फूलों के उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर, जल्दी ही बनेगा देश का सिरमौर

वायुसेना अधिकारी ने बताई उभरती तकनीकों की अहमियत
भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने ‘युद्ध को प्रभावित करने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने खासतौर से एआई और मशीन लर्निंग, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष एवं प्रति-अंतरिक्ष तकनीक, निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW) और हाइपरसोनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला।