बिलासपुर-सरगुजा संभाग में भारी बारिश का अलर्ट, 25 जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मानसून (Monsoon) ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश में पिछले 24 घंटों में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा (Moderate rainfall) दर्ज की गई है और मौसम विभाग (IMD Alert) ने आने वाले 5 दिनों के लिए येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी किया है।

राजधानी रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर और दुर्ग संभागों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कई जिलों में तेज बारिश के साथ वज्रपात (thunderstorm with heavy rain) की चेतावनी भी जारी की गई है। इस बार बारिश का यह दौर जून में अब तक की कम बारिश की भरपाई कर सकता है।

पिछले दस दिनों में 25.25 मिमी औसत बारिश

राज्य में पिछले 10 दिनों में 25.25 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। हफ्तेभर पहले बस्तर में अटका मानसून रायपुर से होते हुए सरगुजा पहुंचा था। इसके बाद से ही प्रदेश के अलग-अलग स्थानों में बारिश का दौर जारी है।

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64 साल के इतिहास में पहली बार मई में पहुंचा मानसून

इससे पहले छत्तीसगढ़ में नौतपे के बीच मानसून की एंट्री हो गई थी। प्रदेश में मानसून के पहुंचने की नॉर्मल डेट 13 जून है। लेकिन इस बार 16 दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी थी। वहीं 64 साल के इतिहास में ये पहली बार है, जब मानसून मई माह में छत्तीसगढ़ पहुंचा था। इससे पहले साल 1971 में 1 जून को मानसून पहुंचा था।

राजधानी रायपुर में बादल और बौछारें

रायपुर शहर में पिछले 24 घंटे में बादल छाए रहे और कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की गई। पंडरी, मोवा, दलदल सिवनी, शंकर नगर और तेलीबांधा जैसे इलाकों में भी बौछारें पड़ीं। मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists) के अनुसार राजधानी में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री के आसपास बना रहेगा।

जून में अब तक सामान्य से कम बारिश

ओवर ऑल जून महीने की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 41.0 मिमी औसत वर्षा हुई है, जबकि सामान्य औसत 81.0 मिमी होती है। यानी लगभग आधी बारिश ही अब तक हुई है। बलरामपुर इकलौता जिला है जहां नॉर्मल से बहुत अधिक बारिश हुई है।

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वहीं दंतेवाड़ा ऐसा जिला है जहां सामान्य बारिश हुई है। 26 जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही है। इनमें से 17 जिलों में कम और 9 जिलों में कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि मौसम विभाग की माने तो जून का ट्रेंड यही रहा है।

शुरुआती 10 से 12 दिन गर्मी बढ़ती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया या चक्रवातों के चलते मानसून सक्रिय हो जाता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।