भारत-कनाडा CEPA डील पर बढ़ा भरोसा, उच्चायुक्त बोले—समझौता दूर नहीं

कनाडा
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने भारत-कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बड़ा और सकारात्मक संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि यह डील “बिल्कुल भी मुश्किल नहीं” होनी चाहिए और इसके लिए औपचारिक व्यापार वार्ताएं फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में शुरू हो सकती हैं। कनाडा के प्रतिष्ठित अख़बार Financial Post को दिए साक्षात्कार में उच्चायुक्त पटनायक ने बताया कि भारत और कनाडा ने G20 शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग के दौरान CEPA वार्ता शुरू करने का फैसला किया था और फिलहाल दोनों देश Terms of Reference (संदर्भ शर्तों) को अंतिम रूप दे रहे हैं।

 क्यों आसान होगी CEPA डील?
दिनेश पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन कुछ कारणों से यह प्रक्रिया रुकी हुई थी। अब वह “पॉज” हटा लिया गया है। उन्होंने बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney की सरकार ने संसद को 90 दिन का नोटिस दे दिया है, जिसके बाद औपचारिक वार्ताएं शुरू हो सकेंगी।  उनका कहना है कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में आए बदलाव, भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और दोनों देशों द्वारा अलग-अलग व्यापार समझौते किए जाने से CEPA को नया आकार मिलेगा। पटनायक ने कहा -“दोनों पक्षों की मंशा साफ है, इसलिए मुझे भरोसा है कि हम इसे बहुत जल्द पूरा कर लेंगे।”  

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किन सेक्टरों पर होगा फोकस?
उच्चायुक्त ने बताया कि CEPA केवल एक समझौता नहीं, बल्कि लगभग हर बड़े सेक्टर को कवर करेगा। इसमें शामिल होंगे:
 
    डिफेंस और एयरोस्पेस
    माइनिंग और एनर्जी
    निवेश और फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स
    रिसर्च, इनोवेशन और AI
    उन्होंने कहा कि समझौते का मकसद होगा:
    टैरिफ कम करना
    कस्टम्स और दस्तावेज़ी प्रक्रिया सरल बनाना
    नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाना
    लॉजिस्टिक्स और निवेश को आसान बनाना

पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से की
पटनायक ने CEPA की तुलना “शादी” से करते हुए कहा कि जैसे शादी में रिश्ते को आसान बनाने वाली बाधाएं हटाई जाती हैं, वैसे ही यह समझौता व्यापार में आने वाली अड़चनों को खत्म करेगा।

    भारत-कनाडा व्यापार का मौजूदा आंकड़ा
    भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार:
    2024 में भारत का कनाडा को निर्यात: 8.02 अरब कनाडाई डॉलर
    कनाडा से भारत का आयात: 5.30 अरब कनाडाई डॉलर
    यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

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CEPA से आगे भी रिश्तों पर जोर
दिनेश पटनायक ने साफ किया कि CEPA अहम जरूर है, लेकिन यही एकमात्र केंद्रबिंदु नहीं है। भारत और कनाडा जल्द ही Canada-India Friendship Society शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की संसदों, सांसदों, नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सीधा संवाद बढ़े।उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में रिश्तों में आई “छोटी-सी खरोंच” के बावजूद  लोगों के बीच संबंध मजबूत रहे, व्यापार बढ़ता रहा, शिक्षा, शोध और नवाचार पर कोई असर नहीं पड़ा।  यह दोनों देशों के रिश्तों की असली मजबूती दिखाता है।