फिरोजाबाद. न्याय में देरी अन्याय है. अदालत में लंबित मुकदमों को लेकर यह कहावत आपने खूब सुनी होगी. यूपी के फिरोजाबाद में एक ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां लगभग 3 दशक पहले के एक अदालती मामले में पीड़ित पक्ष को आखिरकार न्याय मिल गया है. जनपद एवं सत्र न्यायालय में कई साल पुराने एक मामले में सजा सुनाई गई है. यह मामला एससी-एसटी एक्ट का था, जिसमें कोर्ट ने पीड़ित को इंसाफ देने वाला फैसला सुनाया है.
फिरोजाबाद के डीजीसी क्राइम राजीव उपाध्याय प्रियदर्शी ने बताया कि थाना फरिहा क्षेत्र के चिरावली गांव के रहने वाले शालिग्राम ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसमें शालिग्राम ने आरोप लगाया था कि 10 जुलाई 1995 को फरिहा के रहने वाले जगदीश यादव ने गाड़ी रोककर उनके साथ गाली-गलौच की, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया. साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी. पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच के बाद कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी.
मामला अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद सालों तक इसमें सुनवाई चलती रही. आखिरकार एससी-एसटी कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई और जज ने सजा का ऐलान किया. एससी-एसटी कोर्ट के जज इफराक अहमद ने मामले में सभी गवाहों और तथ्यों के आधार पर आरोपी जगदीश को 29 साल बाद 4 वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई. साथ ही उसके ऊपर ₹3000 का जुर्माना भी लगाया. जुर्माना न देने पर चार महीने अधिक कारावास का आदेश दिया है.
कानूनी कार्रवाई और गवाहों के चलते लगा समय
मामले की पैरवी कर रहे वकील नरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि इस मामले में 29 साल का समय इसलिए लग गया, क्योंकि इसमें तथ्यों और गवाहों के चलते तारीख बदलती रही. कोर्ट में तथ्यों और गवाहों के आधार पर ही सजा का ऐलान हुआ. हालांकि देर से ही सही, अदालत ने पीड़ित के पक्ष में मुकदमे का फैसला सुनाया.