वंदे भारत एक्सप्रेस की टक्कर से गाय की मौत, ट्रैक के पास पड़ी रही लाश, कहाँ गए गौ रक्षा के नाम लोगों को पीटने वाले सदस्य, जनता उठा रही सवाल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार की शाम एक ऐसा हादसा हुआ जिसने न केवल इलाके के लोगों को विचलित किया बल्कि गौ सेवा और गौ रक्षा का दावा करने वाले संगठनों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। छत्तीसगढ़ में आए दिन गौ रक्षा के नाम पर लोगों को पीटने की घटना हो रही है| कुछ ही दिन पहले बिलासपुर में परम्परागत काम करने वाले मेहर समाज के व्यक्ति को मारी हुई गाय के बछड़े के खाल उतारने की वजह से बेरहमी से मारपीट कर जेल में डालवा दिया गया था|
सरस्वती नगर थाना क्षेत्र के कोटा रेलवे फाटक पर वंदे भारत एक्सप्रेस (20826) नागपुर से बिलासपुर की ओर तेज़ गति से आ रही थी। उसी दौरान रेलवे फाटक के पास एक गाय अचानक ट्रैक पर आ गई और ट्रेन की टक्कर लगते ही उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शाम 5:45 बजे हुए इस हादसे को देखने वाले लोग स्तब्ध रह गए। घटना के बाद गाय का शव वहीं पड़ा रहा, लेकिन देर रात तक और यहां तक कि अगले दिन सुबह तक भी उसे हटाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा सकी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह घटना तब हुई जब इलाके में अभी अंधेरा भी नहीं हुआ था और लोग अपने-अपने कामों से लौट रहे थे। वंदे भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन के गुजरने के दौरान गेट बंद था, इसलिए आसपास भीड़ तो नहीं थी, लेकिन हादसा साफ तौर पर नजर आ गया। गाय की मृत्यु के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि जल्दी ही प्रशासन या फिर गौ रक्षा संगठन के लोग पहुंचकर व्यवस्था करेंगे, लेकिन यह उम्मीद पूरी रात अधूरी ही रही।
जागरूक पत्रकार ने देर रात 2:53 बजे में एक वीडियो बनाया है जिसमें गाय का शव वहीं पड़ा रहा। इस दौरान कई बार गौ रक्षकों और संगठनों के सक्रिय कार्यकर्ताओं से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने मौके पर पहुंचने की ज़हमत नहीं उठाई। सवाल यह है कि जब घटना शाम को 5:45 पर हुई थी, तब समय रहते शव को हटाने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी। गौरक्षा का दावा करने वाले संगठनों और स्वयंभू गौ भक्तों की चुप्पी ने लोगों को और ज्यादा आक्रोशित कर दिया। आमतौर पर सोशल मीडिया पर गायों की सेवा और तस्करों के खिलाफ अभियान के वीडियो वायरल करने वाले कार्यकर्ता इस मामले में कहीं नजर नहीं आए। यही नहीं, इस हादसे के बाद भी न तो किसी संगठन की तरफ से कोई बयान सामने आया और न ही मौके पर कोई कार्रवाई की गई।
लोगों का कहना है कि जब भी गाय तस्करी या गौ सेवा का दिखावा करने की बात आती है तो बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर प्रचार करते हैं, लेकिन जब ज़मीनी स्तर पर वास्तव में सेवा की ज़रूरत होती है, तो ये सभी कार्यकर्ता और संगठन चुप क्यों हो जाते हैं। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि गौ माता को मां का दर्जा देने वाले लोग आखिर ऐसी परिस्थिति में कहां लापता हो जाते हैं। इस मामले ने रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में गंभीर चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि रात 11 बजे के बाद घटना होती तो यह तर्क दिया जा सकता था कि देर रात होने की वजह से गौ रक्षक मौके पर नहीं पहुंच सके। लेकिन घटना तो शाम को हुई थी और तब ना तो कोई विशेष बाधा थी और ना ही अंधेरा। इसके बावजूद पूरी रात गाय का शव ट्रैक के पास पड़ा रहा।

1. गौ माता के सम्मानजनक अंतिम संस्कार में लापरवाही

मृत गाय को तुरंत उठाने या उसके सम्मानजनक अंतिम संस्कार जैसी व्यवस्था नहीं हो सकी। गाय का शव पूरी रात वहीं पड़ा रहा। रात 2:53 बजे स्थानीय पत्रकार ने घटनास्थल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में साफ दिखा कि देर रात तक कोई भी गौ रक्षक मौके पर नहीं पहुंचा था।

2. पत्रकार का सवाल

पत्रकार ने सवाल उठाया कि जब हादसा शाम 5:45 बजे हुआ था, तब क्यों गौ रक्षक समय रहते मौके पर नहीं पहुंचे?  अगर घटना देर रात होती, तब देरी को जायज़ ठहराया जा सकता था। लेकिन दिन के उजाले में और शहर के बीचों-बीच हुई घटना के बाद भी कोई कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है।

3. गौ रक्षकों की अनुपस्थिति

गौ रक्षा संघ से जुड़े कई लोगों से संपर्क किया गया। बताया गया कि कई नंबरों पर फोन किया गया, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। सवाल यह भी है कि जो संगठन सोशल मीडिया पर गायों की सेवा, गौ तस्करों की धरपकड़ और “गौ माता रक्षा” की बातें करते हैं, वे इस घटना पर चुप क्यों रहे?

4. जनता के सवाल

घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आम जनता ने कई सवाल खड़े किए: गौ रक्षा संगठन कहाँ थे? क्या गौ माता केवल प्रचार के लिए याद की जाती है? गायों की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार या दफनाने की कोई व्यवस्था है? गौ रक्षा संघ के अध्यक्ष या पदाधिकारी इस संबंध में कोई योजना क्यों नहीं बना पाए? क्या केवल गौ तस्करी रोकने के नाम पर प्रचार-प्रसार ही गौ रक्षकों की भूमिका है?

5. गाय की स्थिति और धर्म का संदर्भ

हिंदू धर्म में गाय को “मां” का दर्जा दिया गया है। गाय का दूध पीकर ही बच्चे बड़े होते हैं। यही कारण है कि गाय की मृत्यु को देखकर कई लोगों का दिल पसीज गया। लेकिन गाय के शव के पास पूरे रातभर किसी प्रकार की गतिविधि न होना और उसके लिए सम्मानजनक अंतिम संस्कार न होना समाज के लिए गंभीर प्रश्न है।

6. सोशल मीडिया पर चर्चा

इस घटना का वीडियो वायरल हुआ। फेसबुक, यूट्यूब, न्यूज़ चैनल और ऑनलाइन वेबसाइटों पर खबर प्रकाशित की गई। लेकिन इसके बावजूद भी संबंधित संगठन या अधिकारी सक्रिय नहीं हुए।

7. आम लोगों का सवाल

लोगों का सवाल है कि जब गाय की मृत्यु हो जाती है तो उसके शव को सम्मानजनक तरीके से उठाने और अंतिम संस्कार की क्या व्यवस्था है। क्या राज्य सरकार या गौ रक्षा संघ के पास इसके लिए कोई विशेष योजना है। यह भी पूछा जा रहा है कि जब गायों को राज्य माता का दर्जा देने की बात कही जाती है, तो फिर ऐसी घटनाओं में उनकी देखरेख और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।

8. हादसे की खबर सोशल मीडिया में वायरल

हादसे की खबर और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। कई ऑनलाइन पोर्टल, समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल ने इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया। बावजूद इसके, गौ रक्षा संगठनों की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे आम जनता के बीच यह धारणा बन गई कि गौ रक्षक संगठन केवल प्रचार के लिए सक्रिय रहते हैं और असली जिम्मेदारी उठाने से कतराते हैं।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन गायों की तस्करी और व्यापार की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन हर बार गौ रक्षा संगठन मौके पर नहीं पहुंचते। यह सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं, कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जब गाय का दूध पीकर हर बच्चा बड़ा होता है और गाय को धर्म में मां का दर्जा दिया गया है, तो फिर उसकी मृत्यु के बाद उसका सम्मान क्यों नहीं किया जाता। इस पूरे मामले ने रायपुर में गौ रक्षा और उससे जुड़े संगठनों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आम जनता खुले तौर पर कह रही है कि यदि संगठन केवल वीडियो बनाने और प्रचार तक सीमित रहेंगे तो उनका उद्देश्य गौ सेवा नहीं बल्कि महज पब्लिसिटी स्टंट रह जाएगा। कोटा रेलवे फाटक पर हुई यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि जमीनी स्तर पर गौ सेवा के नाम पर जिम्मेदारी निभाने वाले गायब हो जाते हैं और केवल दिखावा करने वाले वीडियो बनाकर वायरल करने का काम करते हैं।
अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस तरह की घटनाओं के लिए कोई ठोस व्यवस्था करेगा। क्या रेलवे और स्थानीय निकाय मिलकर ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाएंगे। साथ ही यह भी देखा जाना बाकी है कि गौ रक्षा संगठन इस आलोचना के बाद कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।

फिलहाल, इस दर्दनाक हादसे ने लोगों के मन में गहरी पीड़ा और सवाल दोनों छोड़ दिए हैं। गाय की मृत्यु के बाद पूरी रात उसका शव वहीं पड़ा रहना इस बात का संकेत है कि जो संगठन और लोग स्वयं को गौ माता का भक्त बताते हैं, वे अपने दावों पर खरे नहीं उतर पा रहे।

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