पीली हल्दी तो सभी खाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुनी है ‘नीली हल्दी’? जानिए इसके चमत्कारी औषधीय फायदे

हल्दी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में गहरा पीला रंग आता है। हम सभी जानते हैं कि पीली हल्दी हमारी रसोई की शान है, क्योंकि यह सेहत और स्किन दोनों के लिए काफी फायदेमंद होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की मिट्टी में एक ऐसी दुर्लभ हल्दी भी उगती है जो पीली नहीं, बल्कि अंदर से

नीले रंग की होती है?

जी हां, इसे 'नीला सोना' भी कहा जा सकता है क्योंकि यह सामान्य मसाले से कहीं बढ़कर, एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है। आइए, शारदा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से जानते हैं इसके बारे में।

क्या है नीली हल्दी?

यह एक बहुत ही दुर्लभ पौधा है जिसे विज्ञान की भाषा में करकुमा कैसिया (Curcuma Caesia) कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग इसे 'काली हल्दी' के नाम से भी जानते हैं। यह सामान्य हल्दी से बिल्कुल अलग दिखती है। जब आप इसकी जड़ को तोड़ते हैं, तो यह अंदर से चमकदार पीली नहीं, बल्कि गहरे नीले या नीले-काले रंग की निकलती है। यह मुख्य रूप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा इलाकों में ही पाई जाती है।

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क्यों है यह इतनी खास?

हम जो पीली हल्दी खाते हैं, उसमें 'करक्यूमिन' होता है, जो उसे पीला रंग और स्वाद देता है, लेकिन नीली हल्दी का मामला थोड़ा अलग है। इसमें करक्यूमिन बहुत कम होता है, लेकिन इसमें कपूर और कई तरह के 'एशेंशियल ऑयल्स' भरपूर मात्रा में होते हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है और इसमें कपूर जैसी तेज महक आती है। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल खाना पकाने में नहीं, बल्कि आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में दवा के तौर पर किया जाता है।

नीली हल्दी के अद्भुत फायदे

नीली हल्दी को इसके औषधीय गुणों के कारण 'सुपरचार्ज्ड' माना जाता है। सही मात्रा में इस्तेमाल करने पर इसके कई फायदे हैं:

    जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न या किसी चोट के दर्द में यह बहुत राहत देती है। यह सूजन को कम करने में भी कारगर मानी जाती है।
    इसमें रोगाणुओं से लड़ने की ताकत होती है, जो इन्फेक्शन को दूर रखने और घावों को भरने में मदद करती है।
    पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल खांसी, अस्थमा और छाती में जकड़न जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है।

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इसके अलावा, यह पाचन को भी सुधारती है और पेट की गैस को कम करती है। साथ ही, त्वचा की खुजली, रशेज और छोटे-मोटे घावों पर इसका लेप बहुत फायदेमंद होता है।

सावधानी भी है जरूरी

चूंकि, नीली हल्दी में बहुत शक्तिशाली तत्व होते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत संभलकर करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इसे हमेशा कम मात्रा में ही यूज करें। गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में लेने पर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।