अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम को बढ़ावा देने 5 शासकीय, 3 निजी विश्वविद्यालयों एवं 85 महाविद्यालयों ने बोट के साथ किया एमओयू

भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ उद्योग आधारित व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त हो और रोजगारपरक कौशल में वृद्धि हो, इस उद्देश्य से बुधवार को अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) को बढ़ावा देने के लिए अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा की उपस्थिति में 85 महाविद्यालयों, 5 शासकीय एवं 3 निजी विश्वविद्यालयों ने क्रिस्प, नई दिल्ली (CRISP) के सहयोग से बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT-पश्चिमी क्षेत्र, मुम्‍बई) के साथ एमओयू किया।

महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (BOAT- पश्चिमी क्षेत्र) के पदाधिकारियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। राज्य स्तरीय समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह का आयोजन सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में भोपाल में हुआ।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि वर्ष 2024–25 में एईडीपी (Apprenticeship Embedded Degree Program) प्रारंभ किया गया था। विभाग का प्रयास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, शिक्षा को रोजगारमूलक बनाया जाए तथा विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ, उद्योग जगत की आवश्यकता अनुरूप रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

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 राजन ने कहा कि वर्तमान में आईआईटी दिल्ली के सहयोग से AI, FinTech with AI एवं एईडीपी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। आज की आवश्यकता के अनुरूप विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग, स्वयं पोर्टल सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए निरंतर आगे बढ़ रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।  राजन ने कहा कि एईडीपी पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप की सुविधा मिलेगी। साथ ही अप्रेंटिसशिप अवधि के दौरान प्रतिमाह स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एईडीपी कोर्स के क्रियान्वयन में निजी शैक्षणिक संस्थान भी आगे आ रहे हैं।

विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में विभाग लगातार कर रहा प्रयास

आयुक्त,उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में रोजगार निमित्त कौशल बढ़ेगा और उन्हें करियर के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

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सेवानिवृत्त आईएएस एवं संस्थापक सदस्य, सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (Centre for Research in Schemes and Policies)  राधेश्याम जुलानिया ने क्रिस्प (CRISP) द्वारा किए जा रहे कार्यों के संबंध में महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को विस्तार से जानकारी दी।

एमओयू का उद्देश्य

एमओयू कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप से जोड़ना है। इसके अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में AEDP लागू करने वाले संस्थानों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को उद्योग आधारित व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनका रोजगार निमित्त कौशल निखरेगा। साथ ही अकादमिक शिक्षा को कौशल एवं उद्योग आवश्यकताओं से जोड़कर युवाओं को भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए सक्षम और तैयार किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को BOAT के अधिकारियों द्वारा नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) पोर्टल की कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया।

समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम में डॉ. पी.एन. जुमले (निदेशक-प्रशिक्षण, Board of Apprenticeship Training (BOAT) – Western Region) सहित विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव तथा महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

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उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2024–25 में एईडीपी (Apprenticeship Embedded Degree Program) प्रारंभ किया गया था। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में 6 सेक्टर स्किल काउंसिल से जुड़े 7 पाठ्यक्रमों का संचालन प्रदेश के 36 महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में किया गया। शैक्षणिक वर्ष 2025–26 में कार्यक्रम का विस्तार करते हुए 7 सेक्टर स्किल काउंसिल से संबद्ध 10 पाठ्यक्रमों का प्रदेश के 85 महाविद्यालयों एवं 5 विश्वविद्यालयों में संचालन किया जा रहा है। आगामी शैक्षणिक वर्ष 2026–27 में इसका और अधिक विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।