पामगढ़ : बिलासपुर रेलवे घटना, लम्बे संघर्ष के बाद हुआ अंतिम संस्कार, बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

बिलासपुर रेलवे ठेका कर्मी की घटना  के लम्बे संघर्ष करने के बाद आखिरकार बुधवार को नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। हाइकोर्ट ने इस मामले में स्वत संज्ञान लेते हुए मंगलवार को अपना आदेश सुनाया इसके बाद देर रात परिजन और आन्दोलनकारियों से प्रशासन ने बातचीत की। इसके बाद आंदोलन वापस लेने को राजी हुए। हाइकोर्ट कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर परिवार चाहे तो लेबर कोर्ट में अतिरिक्त मुआवजे के लिए मामला पेश कर सकती है। जिसके बाद बुधवार की सुबह से ही मृतक प्रताप बर्मन के गृह निवास मूलमुला में लोगों का आना शुरू हो गया था। इसी बीच समाज के गुरु और केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब पहुंचे इसके बाद दोपहर 3:30 बजे के आसपास अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

घर से परिजनों के अंतिम दर्शन के बाद शव यात्रा मुक्तिधाम के लिए निकल गई। जिसमें मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक शेषराज हरवंस, जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, भीम आर्मी के पदाधिकारी और समाज के लोग शामिल हुए। मृतक के  बड़े भाई पंकज और मृतक के बच्ची ने मुखाग्नि दी।

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इससे पहले घटना के 10 दिन हाइकोर्ट के आदेश के बाद देर रात हुई चर्चा में प्रशासन और परिजनों के बीच सामंजस्य से बैठाया गया। जिसमें अपर कलेक्टर शिव बनर्जी, एडिशनल एसपी राजेंद्र जयसवाल और रेलवे मेंटेनेंस विंग के सीडीपीओ प्रणय मिश्रा के साथ परिजनों की लम्बी चर्चा हुई। इस दौरान मृतक प्रताप बर्मन के परिजनों को  रेलवे और प्रशासन सहित ठेकेदार की तरफ से कुल 26.45 लाख रुपए मुआवजा दिया गया। जबकि पत्नी खुशबु बर्मन को आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दी जाएगी| साथ ही उनकी बच्चे को 12वीं तक की पढ़ाई रेलवे स्कूल में निशुल्क कराई जाएगी।

आपको बता दें कि घटना के बाद से लगातार परिजनों के साथ भीम आर्मी की टीम संघर्ष कर रही थी। लगातार डीआरएम ऑफिस के सामने आंदोलन करने के पश्चात इस मामले में अन्य संगठनों की नजर पड़ी। उन्होंने भी अपना समर्थन इस आंदोलन को दिया| जिसके कारण आंदोलन को और बल मिला। सभी एक जुट होकर मृतक के परिजनों को एक करोड रुपए, पत्नी को सरकारी नौकरी और बच्चे की पढ़ाई को लेकर आंदोलन कर रहे थे।

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ठेकेदार की तरफ से हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि रेलवे कर्मी सुखराम मीणा की लापरवाही से ही यह हादसा हुआ है। उसी की जिम्मेदारी थी कि बिजली सप्लाई बंद करके मेंटेनेंस कार्य कराया जाए। लेकिन उसने बिना बिजली बंद कराए  ठेका कर्मी को बोगी के ऊपर चढ़ा दिया। जिससे यह हादसा हुआ है।