छत्तीसगढ़ के विधानसभा सड़क पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी कर रहे लोगों पर कार्यवाही की मांग को लेकर नग्न प्रदर्शन को चाहती तो सरकार रोक सकती थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने इनके पत्र को नज़रंदाज़ कर दिया| जिससे क्षुब्त होकर यह प्रदर्शन युवाओं द्वारा किया गया | इससे पूर्व भी रायपुर कलेक्टर को पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी दी गई थी जिसे नज़रंदाज़ कर दिया गया | प्रदर्शन कर रहे 29 आन्दोलनकारियों को जेल में बंद कर दिया गया है| जिसे तत्काल रिहा नहीं करने की स्थिति में प्रदेशभर में उग्र आन्दोलन की जाएगी| उक्त बातें बिलासपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही|
अनुसूचित जाति और जनजाति युवा संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता की जिसमें उन्होंने बताया की 3 दिसम्बर को सामान्य प्रशासन ने अपने जारी पत्र में जानकारी दी थी की 267 लोग फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं| 25 माह बीत जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से उन लोगों पर कोई कार्यवाही नही की गई| जिसके बाद अनुविभागीय अधिकारी रायपुर को पत्र लिखकर 10 दिनों तक आमरण अनशन किया| जिसमे कई सदस्य मरणासन्न अवस्था में अस्पताल में दाखिल किया गया| लेकिन शासन प्रशासन ने कोई सुध नही ली| फिर 28 जून को रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर 18 जुलाई को नग्न प्रदर्शन करने की बात कही थी| जिसे भी नज़रंदाज़ कर दिया गया|
जिससे दुखी होकर 29 साथियों ने विधानसभा के पास नग्न प्रदर्शन किया| जिसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर बर्बरता पूर्वक पिटाई की गई और उन्हें जेल में बंद कर दिया गया| साथ ही प्रदर्शन कर रहे साथियों पर लोक सेवक पर हमला करने जैसी झूठी धाराएं भी लगा दी गई| इसके अलावा 6 अन्य युवाओं को जो आन्दोलन में शामिल नहीं थे | उन्हें बिलासपुर जेल में बंद कर दिया है| प्रेसवार्ता ने उन्होंने सभी गिरफ्तार युवाओं को तत्काल रिहा करने की मांग की है| रिहा नहीं करने पर प्रदेश भर में उग्र आन्दोलन करने की चेतावनी दी है|