इस तरह से सुलझाएं बच्चों के बीच होने वाले झगड़े, आइए जानते हैं कैसे ?

अगर आपका बच्चा भाई-बहन या दोस्तों के साथ खेलते समय बार-बार उनकी शिकायतें आपके पास लेकर आता है, उनके साथ अपनी कोई भी चीज शेयर नहीं करना चाहता है तो ये टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं। ध्यान रखिए, मतभेद होना स्वाभाविक बात है। ऐसे में बच्चों को शुरू से ही मतभेदों को स्वीकारने और इसे अच्छी तरह संभालने के तरीके समझाएं। आइए जानते हैं कैसे।

समझदारी से काम लेना सिखाएं-
बच्चों को समझाएं कि उनके दोस्त या कजन्स जब उसके खिलौनों के साथ खेल रहे होते हैं तो हो सकता है उनके पास वो खास खिलौना न हो, जो उनके मन में उस खिलौने को लेकर उत्सुकता पैदा कर रहा हो। ऐसे में उनके इस व्यवहार पर चिढ़ने की जगह उनके साथ मिलकर खेलने की कोशिश करें। बच्चे को समझाएं की जब आप उनकी जगह होते हैं और ऐसा महसूस करते हैं तो उस समय उसे कैसा व्यवहार करना चाहिए।

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समस्या सुलझाना सिखाएं-
आप बच्चे के झगड़ों को सुलझाने की जगह उसे खुद उसकी समस्या का समाधान ढूंढ़ना सिखाएं। उदाहरण के लिए उससे कहें कि वो बारी-बारी अपने दोस्त के साथ खिलौने से खेलें। हो सकता है कई बार उन्हें मामला सुलझाने में दिक्कत हो तो उन्हें विश्वास दिलाएं कि आप उन्हें बेहतर सुझाव दे सकती हैं। ऐसे में जब बच्चों के बीच झगड़ा बढ़ने लगेगा तो वो सबसे पहले आप के पास आएगा। 

गलतियों को स्वीकारना सिखाएं-
कई बार सॉरी कह देने भर से बड़ी-बड़ी बहसों से बचा जा सकता है।अपने बच्चों को ग़लती करने के बाद उत्तेजित होने की जगह शांत रहकर ग़लती को समझने और माफ़ी मांगने के लिए कहें। उनसे कहें कि माफ़ी मांगने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि ग़लतियां हर किसी से हो सकती है। बस, इसे दोहराए नहीं।

शांत रहना सिखाएं-
अपने बच्चे को गुस्सा आने पर खुद को शांत रखने का तरीका सिखाएं। उदाहरण के लिए, उन्हें समझाएं कि जब कभी उन्हें गुस्सा आए, वो लंबी सांसें लें या फिर वहां से हट जाएं या कहीं और अपना ध्यान लगाएं।

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रोल मॉडल बनें-
बच्चों के लिए उनके माता-पिता ही उनके रोल मॉडल होते हैं। वो अपने माता-पिती को देखकर ही कई बातें अपने आप ही सीख लेते हैं। इसलिए जब कभी आपके और आपके पार्टनर के बीच वाद-विवाद हो रहा हो तो अपनी भाषा का ख़्याल रखें। कोशिश करें कि आप बच्चों के सामने बहस न करें और ही एक-दूसरे पर चिल्लाएं। आपके ऐसा करने से उनपर गलत असर पड़ेगा।