मुंबई
भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात ने 2024-25 में रिकॉर्ड उच्च मूल्य 62,408 करोड़ रुपये को छू लिया, जो 2023-24 के 60,523.89 करोड़ रुपये की तुलना में 3.11 प्रतिशत अधिक है. सरकार ने यह जानकारी दी और बताया कि अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद यह वृद्धि जारी है.
मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. 2013-14 में 95.79 लाख टन उत्पादन से बढ़कर 2024-25 में यह 197.75 लाख टन हो गया, जो 106 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
अप्रैल 2025 से अमेरिका ने भारतीय समुद्री उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर कुल 58.26 प्रतिशत कर दिया, जिसमें झींगा (श्रीम्प) निर्यात प्रमुख है. भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अमेरिका को होने वाले झींगा निर्यात में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
इसके बावजूद, भारत का समुद्री उत्पाद क्षेत्र लचीला और अनुकूल साबित हुआ. अप्रैल–अक्टूबर 2024 (पूर्व-शुल्क) और अप्रैल–अक्टूबर 2025 (पश्चात शुल्क) के आंकड़ों की तुलना में, निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत वृद्धि (35,107.6 करोड़ रुपये से 42,322.3 करोड़ रुपये) और मात्रा में 12 प्रतिशत वृद्धि (9.62 लाख टन से 10.73 लाख टन) हुई. वहीं, फ्रोज़न झींगा निर्यात में मूल्य में 17 प्रतिशत और मात्रा में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
मछली पालन और संबंधित योजनाओं के माध्यम से 2014-15 से अब तक 74.66 लाख रोजगार अवसर (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) उत्पन्न किए गए हैं. भारत वर्तमान में 350 से अधिक समुद्री उत्पादों को 130 देशों में निर्यात करता है. इसमें 62 प्रतिशत मूल्य मछली पालन से आता है.
मूल्य वर्धित (वैल्यू एडेड) निर्यात ने पिछले पांच वर्षों में 56 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जो 4,863.40 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,589.93 करोड़ रुपये हो गया.
सरकार ने फिशरी सेक्टर में निवेश को बढ़ाया है. विभिन्न योजनाओं जैसे ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) के तहत कुल 38,572 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई या घोषणा की गई.
मंत्रालय का कहना है कि इन उपायों और रणनीतियों की वजह से भारत वैश्विक स्तर पर उच्च मूल्य, प्रोसेस्ड समुद्री उत्पादों का हब बनता जा रहा है.