मायावती का ऐक्शन प्लान, कांशीराम पुण्यतिथि पर BSP दिखाएगी अपनी राजनीतिक ताकत

लखनऊ 
बसपा सुप्रीमो मायावती मिशन-2027 को लेकर ऐक्शन मोड में हैं। कांशीराम की पुण्य की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करने जा रही हैं। बसपा,सालों बाद इसमें अपनी ताक़त दिखाएगी। इस कार्यक्रम में मायावती के साथ आकाश आनंद भी रहेंगे। उन्होंने रविवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में तैयारियों का जायज़ा लिया और इसे सफल बनाने के निर्देश दिया।

मायावती ने ज़िला से लेकर बूथ स्तर की कमेटी के गठन को लेकर चलाये गये अभियान की गहन की। लगभग 80 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति पर संतोष व्यक्त करते हुये आगे बाकी बचे कार्यों के लिए नया निर्देश दिया।बैठक में बताया कि इस बार कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ के वीआईपी रोड पर स्थित कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में श्रद्धा-सुमन कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें जिसमें वे ख़ुद शामिल होकर आगे की राजनीतिक चुनौतियों से संघर्ष के लिये रूपरेखा पर भी चर्चा करेंगी।

मायावती ने कहा कि ख़ासकर विरोधी पार्टियों द्वारा अन्दर-अन्दर आपस में मिलकर तथा साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हर प्रकार के हथकण्डे अपनाकर बी.एस.पी. पार्टी, मूवमेन्ट तथा उसके आयरन लेडी नेतृत्व को कमजोर करने का षडयंत्र लगातार जारी है ताकि दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर आधारित बहुजन समाज के लोगों को अत्यन्त कठिनाई से मिले उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों से वंचित करके उन्हें लाचार और मजबूर बनाये रखा जाये तथा हर कीमत पर उन्हें शासक वर्ग बनने से रोका जाये तथा इस क्रम में उन्हें आगे बढ़ने का वैसा सुनहरा अवसर ना मिल पाये जैसाकि बी.एस.पी. की यूपी में बहनजी की रही सरकारों में सर्वसमाज के लोगों को आम तौर से तथा बहुजन समाज के लोगों को खास तौर से मिला था और प्रदेश के विकास के साथ-साथ उन सबकी तरक्की हुई थी।

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ट्रम्प टैरिफ नई चुनौती
अमेरिका द्वारा थोपे गये भारी भरकम 50 प्रतिशत ’ट्रम्प टैरिफ’ के आतंक से उभरी नई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मायावती ने कहा कि इससे सही से निपटने के लिए ख़ासकर भारत व सत्ताधारी पार्टी भाजपा को व्यापक जन व देशहित का ध्यान रखते हुये अपनी नीतियों व कार्यक्रमों में ठोस व भारी सुधारवादी रवैया अपनाने की ज़रूरत है, वरना देश के विशाल बहुजनों की गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, अशिक्षा, घरो से दूर पलायन की विवशता आदि की समस्यायें और भी जटिल होकर देश के मान-सम्मान को भी दुनिया में प्रभावित करेंगी, जिससे बचना बहुत ज़रूरी है।