मिलता नहीं अपनों का सहारा तो आज मैं यहां नहीं होता, संकट और तनाव है जीवन का हिस्सा

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आत्महत्या रोधक दिवस पर विशेष

 

जांजगीर-चांपा के मेऊ गांव के निवासी भगत लॉकडाउन के बाद आर्थिक रूप से काफी परेशान हो चुके थे । एक दिन उन्होंने जीवन समाप्त करने का प्रयास किया लेकिन परिवार वालों की सूझ-बूझ से मेरी जान बचा ली गई । परिवार वाले बताते है भगत कई दिनों से डिप्रेशन में चल रहे थे तनाव के कारण घर में आए दिन झगड़ा लड़ाई होती रहती थी । भविष्य की चिंता और लॉकडाउन से परेशान थे ।जब देश लॉकडाउन में शुरू हुआ तब धीरे-धीरे आमदनी कम होती चली गई और बचत भी खत्म हो गई थी ।
भगत कहते है उस समय मुझे लगा कि मैं अपने जीवन को समाप्त कर लूं तो मुझे इस सब संकट से मुक्ति मिल जाएगी । मैंने जीवन समाप्त करने का प्रयास किया लेकिन परिवार और दोस्तों ने बचा लिया ।फिर मुझे मनोचिकित्सक, पत्नी और दोस्तों की सलाह ने दी की जीवन अनमोल है मनोचिकित्सक और पत्नी मुझे सही समय पर संभाला दिया ।

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धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आता चला गया गांव में ही रहकर चाय की दुकान लगाई ।ठेले पर रखकर सब्जियां बेची, धीरे-धीरे जीवन में उत्साह लौटने लगा अब गॉव से दुर्ग ज़िले  में आ गया हूँ ।मकानों में छत ढलाई की ठेकेदारी का काम शुरू किया  है । अब ढलाई के काम का ठेका लेने लगा हूँ ।अपने ही गॉव के  4 लोगों को उस में रोजगार भी दिया हूँ ।अब जीवन सुंदर दिखने लगा है ।“मेरा मानना है किसी भी संकट को  चुनौती के रूप में लेना चाहिए । जब मैंने जीवन समाप्त करने का प्रयास किया तो सबसे ज्यादा मेरे दोस्तों ने मेरी मदद करी पत्नी और परिवार के सदस्यों ने मुझे संभाला दिया आर्थिक रूप से थोड़ी-थोड़ी मदद भी करी  जिससे मेरा जीवन पुनः शुरू हुआ मैं लोगों से यही कहना चाहूंगा कि जिंदगी में अच्छे दोस्त और अच्छे सलाहकार रखना चाहिए” ऐसा भगत कहते हैं ।


क्या है कारण
राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय बिलासपुर के स्पर्श क्लिनिकल चिकित्सक मनोवैज्ञानिक, डॉ.दिनेश कुमार लहरी कहते है तनाव जब अपने चरम बिन्दु पर होता है तब व्यक्ति जीवन का अंत करने पर आतुर हो जाता है । जीवन का अंत करने से पहले व्यक्ति में कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं । अत्यधिक गुस्सा करना या बदला लेने की बात करना । चिंतित, उत्तेजित, मारने का रास्ता खोजना, दूसरों पर बोझ होने का आभास करना । शराब या नशे का उपयोग करने लगना ।एकांत को पसंद करना । मन:स्थिती में जल्दी जल्दी परिवर्तन आना ।

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कैसे संभाला
अगर इस तरह के लक्षण किसी व्यक्ति में दिखाई देने लगे तो तुरंत उसको संभाले की आवश्यकता होती है यही संभाला उसको जीवन के अंत करने से रोकता है और उचित समय पर मिल गई सलाह उसके जीवन को बचा लेती है ।

संभाला देने के समय व्यक्ति का अधिक से अधिक बातों को सुना जाए और तर्क क्षमता के साथ उसका जवाब दिया जाए । ध्यान रहे ऐसे व्यक्ति को प्यार की भाषा में  समझाना होता है ।  उसको प्यार की बहुत जरूरत होती है उसके साथ नरमी का व्यवहार करना आवश्यक होता है ।

मानसिक स्वास्थ्य पर चल रहे कई कार्यक्रम- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2019 के आंकड़ों के अनुसार 26.4 प्रति 100,000 व्यक्ति की दर के साथ छत्तीसगढ़ देश में सर्वाधिक आत्महत्या की दरों वाले राज्यों में से एक है। इनको ध्यान में रख, तनाव प्रबंधन और लोगों की मदद करने मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। जिला मुख्यालय से गांवों तक मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करने कि काम किया जा है। आत्महत्या की रोकथाम और तनाव प्रबंधन के अलावा, जीवन कौशल के लिए प्रशिक्षण, विशेषज्ञों द्वारा मुफ्त परामर्श और मानसिक विकारों वाले लोगों की पहचान करने जैसी गतिविधियां भी आयोजित हो रही है।

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