रातों-रात लाल हो गया इस नदी का रंग, बह रहा है इनका खून…

दक्षिण और उत्तर कोरिया की सीमा पर बहने वाली एक नदी Imjin River का पानी खून से पूरी तरह से लाल हो गया है. नदी की तस्वीरें पर्यावरण पर काम करने वाली एक संस्था ने खींची. इसके बाद से स्थानीय मीडिया और आम लोगों में इस लाल नदी को लेकर डर फैला हुआ है. दरअसल नदी में लगभग 47000 सूअरों का खून बह रहा है, जिनमें से कई अफ्रीकन स्वाइन फ्लू (ASF) से प्रभावित माने जा रहे हैं. ऐसे में इस डर से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि नदी के पानी से दूसरे जानवर भी बीमार हो सकते हैं.

पिछले साल दुनिया के कई देशों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का प्रकोप हुआ था, कोरिया में उन देशों में एक था. उत्तर कोरिया में मई में अफ्रीकन फ्लू का पहला मामला सामने आया था. इसके बाद अपने यहां इसे रोकने के लिए दक्षिण कोरिया की सरकार ने काफी बंदोबस्त किए. यहां पर कुल 6,700 सूअर पालन केंद्र हैं, जिनमें लाखों की संख्या में सूअर पाले जा रहे हैं. ऐसे में सूअरों का आना-जाना या अवैध तस्करी रोकने के लिए दक्षिण कोरियाई सीमाओं पर बाड़ लगा दी गई. अपने यहां के सूअरों को फ्लू से बचाने के लिए यहां की सरकार इस कदर सतर्क है कि यहां की सेना को इजाजत है कि वो सीमा पार करने वाले किसी भी जानवर को गोली मार सकती है.
इस सारी मुस्तैदी के बाद भी दक्षिण कोरिया में दो महीने पहले सितंबर में स्वाइन फ्लू का पहला मामला आया और इसके बाद से अबतक 10 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से हालांकि इंसानों को कुछ खास नुकसान नहीं होता लेकिन आंतरिक रक्तस्त्राव होने की वजह से सूअर काफी बीमार हो जाते हैं और ऐसे संक्रमित सूअर को खाना फायदे की बात नहीं. यही देखते हुए दक्षिण कोरियाई सरकार ने स्थानीय स्तर पर सूअर पालकों से सूअरों को मार देने का अनुरोध किया.

See also  बढ़ती मुसीबतों में घिरे Asim Munir, भारत तनाव के बीच BLA हमले और अफगान मोर्चे की चुनौती

द इंडिपेंडेंट (The Independent) में कोरियन न्यूज एजेंसी Yonhap के हवाले से बताया गया है कि सरकार ने खासकर Yeoncheon इलाके में सूअरों के संक्रमण के डर से वहां स्थानीय स्तर पर सूअर पालन करने वालों से सूअर मारने का अनुरोध किया था. इसके बाद हजारों की संख्या में सूअर मारे गए. सूअरों को मारने के बाद उन्हें दफनाने की प्रक्रिया चल ही रही थी लेकिन दफनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक कंटेनर मिलने में देर होने की वजह से उन्हें डंपिंग यार्ड में जहां का तहां छोड़ दिया गया. इसके बाद हुई तेज बारिश से मृत सूअरों का खून नदी के पानी में मिलने लगा.

इस लाल नदी की तस्वीरें प्रांत के एक एनजीओ Yeoncheon Imjin River Civic Network ने खींचकर पोस्ट कर दीं. तुरंत ही ये तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए. मंगलवार शाम कोरियन चैनलों पर खून से लाल नदी की तस्वीरें दिखाई जाने लगीं. पर्यावरणविद् चिंता जताने लगे कि सूअरों के खून की वजह से नदी का पानी संक्रमित हो जाएगा और दूसरे जानवरों पर भी इसका असर पड़ेगा. हालांकि agriculture ministry के अधिकारियों ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा कि सूअरों को मारे जाने से पहले ही उनके संक्रमण का इलाज किया जा चुका था. ऐसे में नदी के पानी के संक्रमित होने की कोई आशंका नहीं है. इस तसल्ली के बाद भी आम लोग काफी डरे हुए बताए जा रहे हैं और नदी के आसपास भी नहीं फटक रहे. बता दें कि ये नदी कोरिया की सातवीं सबसे बड़ी नदी है, जिसके भरोसे काफी बड़ी आबादी रहती है. ऐसे में सूअरों का खून नदी में मिलने पर उनकी भी दिनचर्या प्रभावित हुई है.

See also  रूसी सेना आने वाले दिनों में कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेनी ठिकानों पर बड़े हमले की तैयारी में

माना जा रहा है कि स्वाइन फ्लू के प्रकोप से स्वस्थ सूअरों को बचाने के लिए अकेले दक्षिण कोरिया में ही अब तक लगभग 380000 सूअर मारे जा चुके हैं. वहीं पड़ोसी देशों में भी अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का कहर बरपा हुआ है. इनमें चीन, वियतनाम और फिलीपींस शामिल हैं. चीन में बड़ी आबादी पोर्क खाती है. वहां अगस्त महीने में 10 लाख से ज्यादा सूअरों के मारे जाने के बाद मांग और पूर्ति (demand and supply) में काफी फर्क आ गया. इसे दूर करने के लिए चीन में ब्रीडिंग कराकर विशालकाय सूअर पाले जा रहे हैं. इन बड़े सूअरों की कीमत आम सूअरों से तीन गुना ज्यादा है. कीमत इतनी बढ़ चुकी है कि काटे जाने के बाद कई सूअर 10,000 yuan (लगभग 1 लाख रुपए) में बिक रहे हैं, जो किसी चीनी प्रांत के नागरिकों की औसत मासिक आय से भी लगभग तीन गुना ज्यादा है.