नदी किनारे लगा शवों का ढेर, गिद्ध और कुत्ते नोच-नोच कर बना रहे अपना आहार

JJohar36garh News|कोरोना संकट के बीच बिहार के बक्सर जिले में इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। सोमवार को यहां के चरित्रवन में शवदाह की जगह नहीं बची। बताया जा रहा है कि गांवों में पिछले एक-डेढ़ महीने से मौतें अचानक बढ़ गई हैं। मरने वाले सभी खांसी-बुखार से पीड़ित थे। चौसा श्मशान घाट पर आने वाले अधिकतर शवों को गंगा में डाल दिया जा रहा है। इनमें से सैकड़ों शव किनारे पर सड़ रहे हैं।

गिद्ध और कुत्ते शवों को नोच-नोच कर अपना आहार बना रहे थे, जिससे कि वहां नजारा और भी वीभत्स हो गया था। स्थानीय अधिकारियों की तरफ से भी इसे साफ करने को लेकर कोई पहल नहीं की गई। ऐसे में परेशान हो चुके स्थानीय लोगों ने मीडिया को इस बात की जानकारी दी। चौसा प्रखंड के पवनी गांव के निवासी अनिल कुमार सिंह कुशवाहा ने बताया कि चौसा, मिश्रवलिया, कटघरवा समेत दर्जनों गांव के लोग घाट पर शवदाह के लिए आते हैं लेकिन, यहां की स्थिति देखकर अब वह दहशत से भर गए हैं। पहले जहां पांच से छह हजार रुपये में अंतिम संस्कार हो जाया करता था वहां अब 14 से 15 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।

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गंगा नदी के किनारे बसे कई अन्य गांवों के लोग जो गंगा के जल का इस्तेमाल करते हैं वह भी यहां शवों का अंबार देख भयाक्रांत हो गए हैं। निश्चित रूप से इस तरह के स्थिति सामने आने के बाद अब दूसरे तरह की महामारी जन्म लेगी। गांव के लोगों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों के भीतर कई ऐसे लोग यहां आए जो शव को सीधे गंगा में प्रवाह कर चले गए। उन लोगों का कहना था कि जिसके शव का प्रवाह करने आए हैं, उसके इलाज में ही वे लोग टूट चुके हैं और इतने पैसे नहीं हैं कि श्मशाम घाट पर शव का विधिवत दाह संस्कार करा सकें।

चरित्रवन और चौसा श्मशान घाट पर दिन-रात चिताएं जल रही हैं। कब्रिस्तानों में भी भीड़ लगी रहती है। पहले जहां चौसा श्मशान घाट पर प्रतिदिन दो से पांच चिताएं जलती थीं, वहीं अब 40 से 50 चिताएं जलाई जा रही हैं। बक्सर में यह आंकड़ा औसतन 90 है।

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चरित्रवन श्मशान घाट पर एक बार में 10 से अधिक शवदाह हो रहे हैं। यहां दिन-रात चिताएं जल रही हैं। चौसा में भी यही हाल हैं। रविवार को बक्सर में 76 शव सरकारी आंकड़ों में दर्ज हुए, जबकि 100 से अधिक दाह-संस्कार हुए। रोजाना 20 से अधिक लोग शमशान घाट में रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराते हैं। चौसा में भी 25 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सात को जलाया गया तो वहीं 16 शवों का नदी में बहा दिया गया।

चौसा CO नवलकांत ने बताया कि उन्होंने SDO के दिशा-निर्देश पर रविवार को श्मशान घाट का जायजा लिया। रात में शव को दाह संस्कार करने में दिक्कत न हो उसके लिए जनरेटर लाइट की व्यवस्था की गई है। गंदगी को साफ करने के लिए दो लोगों को रखा गया है। साथ ही वहां पर दो चौकीदार और एक सलाहकार को नियुक्त किया गया है। वे दाह संस्कार करने वालों की डिटेल भी नोट कर रहे हैं।

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