अब 10 ग्राम प्योर गोल्ड मिलेगा 40 हजार से भी सस्ता! सरकार का बड़ा फैसला

मुंबई 

सोना (Gold) काफी महंगा हो गया है, 24 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड का भाव 1 लाख रुपये के आसपास बना हुआ है. भारत में बड़े पैमाने पर लोग सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं, खासकर महिलाएं गहने लेती हैं. लेकिन अब सोना महंगा होने से महिलाएं चाहकर भी गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद पा रही हैं. इस बीच अब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जिससे आने वाले दिनों में सोने की ज्वेलरी की बिक्री बढ़ सकती है. क्योंकि आप 40 हजार रुपये से कम में 10 ग्राम गोल्ड ज्वेलरी (Gold Jewellery) खरीद सकते हैं.

  दरअसल, सोना इतना महंगा हो गया है कि ग्राहक 22 या 18 कैरेट की जगह सस्ते 9 कैरेट के गहनों की खरीदारी में इंटरेस्ट ले रहे हैं. कम कैरेट वाले गोल्ड ज्वेलरी खरीदना लोग बेहतर समझ रहे हैं, क्योंकि ये जेब पर कम बोझ डालते हैं. इसलिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ऐलान किया है कि अब 9 कैरेट सोने के गहनों पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी. सरकार का तर्क है कि 9 कैरेट गोल्ड पर हॉलमार्क होने से लोग ठगी से बचेंगे.

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9 कैरेट गोल्ड के फायदे 

इसलिए अब 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए भी हॉलमार्किंग (Hallmarking) अनिवार्य है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 9 कैरेट सोने को अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणियों की सूची में शामिल कर लिया है. यह नियम इसी जुलाई से लागू हो गया है, यानी अब आप हॉलमार्क वाले 9 कैरेट वाली गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं. इससे पहले 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य थी.

एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल 9 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब 37000 से 38000 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो सकती है. वहीं, 22 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी के लिए आपको कम से कम 1 लाख रुपये चुकाने होंगे. सरकार के इस कदम से ग्राहकों को सोने की शुद्धता के बारे में सही जानकारी मिलेगी. 9 कैरेट सोना 22 या 24 कैरेट सोने से सस्ता होता है, और इस पर आधुनिक डिजाइन बनाना भी आसान है. 

हॉलमार्किंग से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

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यही नहीं, 9 कैरेट सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा, विदेशों में भी 9 कैरेट गोल्ड की खूब डिमांड है. 9 कैरेट सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों को सुरक्षा मिलेगी, और 9 कैरेट सोने के आभूषणों की लोकप्रियता भी बढ़ेगी. 

अगर फायदे की बात करें तो 9 कैरेट गोल्ड हॉलमार्किंग से गहनों की कीमत कम होगी और लोगों को सस्ता गोल्ड ज्वेलरी खरीदने का बेहतरीन विकल्प मिल जाएगा. हॉलमार्किंग से 9 कैरेट गोल्ड की 37.5% शुद्धता पक्की होगी. नियम के मुताबिक अब ज्वैलर्स और हॉलमार्किंग केंद्रों को इसका पालन करना होगा.

कैसे करें शुद्ध ज्वेलरी की पहचान

सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की जांच करने के लिए, आप भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का BIS-Care ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं. इस ऐप के जरिये आप ज्वेलरी पर दिए गए HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर को डालकर असली या नकली हॉलमार्किंग की पहचान कर सकते हैं. इसके अलावा आप BIS की वेबसाइट पर जाकर भी हॉलमार्क की जांच कर सकते हैं. 

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गौरतलब है कि आप जब 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी लेते हैं तो आपको पता होनी चाहिए कि उसमें 22 कैरेट गोल्ड के साथ 2 कैरेट कोई और मेटल मिक्स होता है. वहीं जब आप 18 कैरेट की ज्वेलरी खरीदते हैं, उसमें 6 कैरेट कोई और मेटल मिला होता है. हालांकि अगर आप निवेश के लिए ज्वेलरी खरीद रहे हैं तो फिर 22 कैरेट की ज्वेलरी ही खरीदें. 

 हॉलमार्क क्यों जरूरी?

हॉलमार्किंग का मतलब होता है सोने की शुद्धता की सही पहचान. जब आप कोई सोने का गहना खरीदते हैं, तो उस पर एक छोटा-सा निशान बना होता है, जो बताता है कि वो गहना कितने कैरेट का है और उसकी गुणवत्ता क्या है. हॉलमार्किंग से ग्राहक को भरोसा रहता है कि जो सोना वह खरीद रहा है, वह असली है और उसकी कीमत के हिसाब से उसमें कोई धोखा नहीं है. इससे न सिर्फ खरीदार को सुरक्षा मिलती है, बल्कि सोने की बिक्री या आगे चलकर एक्सचेंज में भी आसानी होती है.