ओमान में ड्रोन हमले का शिकार बना तेल टैंकर, मिडिल-ईस्ट संघर्ष में भारतीय की मौत

नई दिल्ली
मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध में एक भारतीय व्यक्ति की मौत हो गई है। ओमान में सोमवार को मार्शल द्वीपों के झंडे वाले तेल टैंकर MKD VYOM पर बम से लैस ड्रोन से हमला किया गया, जिसमें जहाज पर सवार एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह हमला मस्कट के तट से दूर हुआ। हमले के चलते जहाज में आग लग गई और इंजन रूम में विस्फोट हुआ। जहाज पर कुल 21 क्रू मेंबर्स थे, जिनमें 16 भारतीय शामिल थे। बाकी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के निकट हुआ, जो फारस की खाड़ी का पतला रास्ता है। वैश्विक तेल व्यापार के लिए यह काफी अहम है। ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर ने बताया कि टैंकर पर लगभग 59,463 मीट्रिक टन कार्गो था और हमला मस्कट से करीब 52 नॉटिकल मील दूर हुआ। यह घटना मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है। इजरायल और अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक आने वाले जहाजों को धमकी दी है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने कई हमलों को अंजाम दिया है, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल शामिल है। इस हमले को ईरान समर्थित ताकतों से जोड़ा जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी ने स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी नहीं ली है। यह क्षेत्र पहले भी समुद्री हमलों का गवाह रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण तनाव और बढ़ गया है। इस हमले में भारत के व्यक्ति की मौत को अमेरिका-ईरान संघर्ष में पहली भारतीय हानि के रूप में देखा जा रहा है।

ओमान ने हमले के बाद जहाज के चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं और तेल की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। यह हमला क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा करने वाला है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव से समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। ओमान जैसे तटवर्ती देशों को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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