ऑनलाइन फूड महंगा होने वाला, डिलीवरी कर्मचारियों की इनकम पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली

ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना आज हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. ऑफिस से थककर आने के बाद या वीकेंड पर दोस्तों संग पार्टी के लिए बस मोबाइल उठाइए और चंद मिनटों में खाना आपके दरवाज़े पर! लेकिन अब यह सुविधा शायद थोड़ी महंगी पड़ सकती है. सरकार के नए फैसले से जोमैटो और स्विगी जैसी बड़ी फूड डिलीवरी कंपनियों पर टैक्स का नया बोझ आ गया है. ये कंपनियां कह रही हैं कि वे यह खर्च अपने ग्राहकों से वसूल सकती हैं. यानी आने वाले दिनों में डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं और जेब पर थोड़ा और बोझ पड़ सकता है.

4 सिंतबर को जीएसटी काउंसिल ने स्पष्ट किया कि अब इन ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को अपने डिलीवरी पार्टनर्स (जो ऑर्डर लेकर आते हैं) के लिए 18% GST खुद से भरना होगा. इसका मतलब यह है कि जोमैटो और स्विगी को हर साल लगभग 180-200 करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा. इससे पहले डिलीवरी बॉय पर यह टैक्स लागू नहीं था, यानी उनकी डिलीवरी फीस पर GST नहीं लगता था. अब सरकार ने कहा है कि प्लेटफॉर्म को उनकी डिलीवरी फीस पर 18 फीसदी GST देना होगा.

See also  बांबे, बीजेपी और बाजार, विदेशी निवेशकों को है भरोसा मोदी आएंगे फिर से सत्ता में एक बार!

उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी ऑर्डर की डिलीवरी फीस 50 रुपये है. पहले Zomato/Swiggy यह 50 रुपये सीधे डिलीवरी पार्टनर को दे देते थे और इस पर कोई GST नहीं लगता था. अब सरकार के नियम के अनुसार इन प्लेटफॉर्म्स को इन 50 रुपयों पर 18 फीसदी यानी 9 रुपये सरकार को टैक्स के रूप में चुकाना होगा. जाहिर है कि इससे कंपनी का खर्च बढ़ जाएगा.

क्या ये खर्च कंपनियां खुद उठाएंगी?

जोमैटो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “इसका कुछ हिस्सा डिलीवरी वर्कर्स पर डाला जाएगा, जिससे उनकी कमाई थोड़ी कम हो सकती है. साथ ही ग्राहकों से भी अतिरिक्त चार्ज लेने पर विचार चल रहा है.” स्विगी के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की कि कंपनी टैक्स का बोझ आगे बढ़ाने के बारे में सोच रही है.

काउंसिल का यह फैसला लंबे समय से चल रहे उस विवाद को खत्म करने का काम करेगा कि डिलीवरी फीस पर टैक्स कौन भरेगा- प्लेटफॉर्म या डिलीवरी पार्टनर. दिसंबर 2024 में जोमैटो को GST अधिकारियों से 2019 से 2022 के समयांतराल के लिए 803 करोड़ रुपये टैक्स और पेनल्टी का नोटिस मिला था. स्विगी को भी इसी मुद्दे पर प्री-डिमांड नोटिस जारी हुआ था. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई स्पष्टता इन नोटिसों पर क्या असर डालती है.

See also  गोवा में नेशनल डीलर्स मीट के दौरान शार्प ने मल्टीफंक्शन प्रिंटर्स के विस्तारित पोर्टफोलियो का अनावरण किया

दोनों कंपनियों पर क्या असर होगा, ब्रोकरेज ने बताया

ब्रोकरेज हाउस जैफरीज़ का मानना है कि यह फैसला जोमैटो और स्विगी दोनों के लिए हल्का निगेटिव साबित होगा, खासकर तब जब दोनों कंपनियों की ग्रोथ पहले से ही धीमी है. हाल के क्वार्टर में जोमैटो का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 451 करोड़ रुपये और स्विगी का 192 करोड़ रुपये रहा. Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, क्योंकि अब डिलीवरी फीस पर 18% जीएसटी चुकाना अनिवार्य होगा.

मामले की जड़ सेंट्रल जीएसटी एक्ट की धारा 9(5) में है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने सर्विस प्रोवाइडर्स की तरफ से टैक्स इकट्ठा कर सरकार को जमा करने का आदेश देती है. हालांकि अब तक डिलीवरी फीस को लेकर स्पष्टता नहीं थी. कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों से ली गई डिलीवरी फीस वे सीधे डिलीवरी पार्टनर्स को देते हैं, और कई बार ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाती या डिस्काउंट दिया जाता है, लेकिन पार्टनर्स को तय रेट पर भुगतान करना ही पड़ता है.

See also  Volkswagen Tayron R-Line की प्री-बुकिंग शुरू, जानें कब होगी लॉन्च

कुल मिलाकर, यह फैसला ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स दोनों के लिए बदलाव लेकर आएगा. अब देखना यह है कि कंपनियां इसे किस तरह संभालती हैं ताकि न तो ग्राहकों की जेब ज्यादा खाली हो और न ही डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई बहुत घटे.