पुलिस अधिकारी आपसे दुर्व्यवहार करें, तब आप क्या करना चाहिए, जाने कानून क्या कहता है : कई बार पुलिस अधिकारी या ऑफिसर्स अपनी शक्तियों का गलत फायदा उठाते है और आम नागरिकों को परेशान करते है। पुलिस द्वार किये जाने वाले इस तरह के दुराचार या दुर्व्यवहार के शिकार हुए लोगों के लिए कानून के तहत उपाय है।
इसे भी पढ़े :-छत्तीसगढ़ में अब बुजुर्गो को बस में नहीं लगेगा पैसा, उल्लंघन करने पर बस मालिकों के खिलाफ होगी कार्रवाई
पुलिस ऑफिसर्स द्वारा दुर्व्यवहार
पुलिस ऑफिसर्स के द्वारा किये गए ऐसे किसी भी दुर्व्यवहार का शिकार हुआ व्यक्ति, उस पुलिस अधिकारी के अगेंस्ट पुलिस स्टेशन में एफआईआर फाइल करा सकता है। यह एफआईआर पीड़ित के पास वाले पुलिस स्टेशन या जहां यह दुरवहवहार हुआ है उस जगह और फाइल की ज सकती है।
अगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर फाइल करने से मना कर दिया जाता है या पीड़ित की कम्प्लेन एक्सेप्ट नहीं की जाती है तो वह पीड़ित व्यक्ति जहां रहता है उस जिले/डिस्ट्रिक्ट के पुलिस अधीक्षक/ऑफ़िसर को इस बारे कम्प्लेन की जा सकती है।
अगर दोनों जगहों से ही पीड़ित को मदद नहीं मिलती है, तो वह उसके क्षेत्राधिकार/जूरिस्डिक्शन में आने वाले मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है और अपनी कम्प्लेन पर सुनवाई की जाने के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा संबंधित पुलिस ऑफ़िसर को एफआईआर फाइल करने का आर्डर दिया जाएगा।
पीड़ित के पास एक यह भी उपाय/सोल्युशन है कि वह एनएचआरसी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या फिर SHRC राज्य मानवाधिकार आयोग को अपनी कम्प्लेन डाक द्वारा भेज सकता है।
इसे भी पढ़े :-तलाक के बाद क्या किसी पत्नी को अपने पति की संपत्ति का हिस्सा मिल सकता है?, जाने भारतीय कानून क्या कहता है
पुलिस अथॉरिटी को कम्प्लेन
पुलिस अधिकारी आपसे दुर्व्यवहार करें, तब आप क्या करना चाहिए, जाने कानून क्या कहता है : एक पीड़ित व्यक्ति पुलिस ऑफिसर्स द्वारा किए गए किसी भी दुर्व्यवहार के बारे में पुलिस अथॉरिटी के पास कम्प्लेन कर सकता है। यह अथॉरिटी इसीलिए बनाई गयी है कि अगर कभी किसी भी नागरिक को पोलिस ऑफिसर्स की तरफ से निराशा मिले तो यह अथॉरिटी उनकी मदद करे और पुलिस ऑफिसर्स को भी जनता के प्रति उनके कर्तव्य याद दिलाये। अगर किसी व्यक्ति को पुलिस ऑफ़िसर द्वारा इस तरह के गंभीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है तो वह डायरेक्ट इस अथॉरिटी के पास कम्प्लेन रजिस्टर कर सकता है।
गंभीर दुर्व्यवहार
- पुलिस कस्टडी में मौत हो जाना
- पुलिस कस्टडी में होने पर गंभीर चोट लगना
- पुलिस कस्टडी में रेप होना (महिला या पुरुष किसी का भी)
- पुलिस ऑफ़िसर द्वारा जबरदस्ती पैसे वसूले जाना।
- इललीगल तरीके से जमीन हड़पना
- गंभीर प्रकार से चोट पहुंचाना
इसे भी पढ़े :- अपने प्रिय की ब्लैकमेलिंग से कैसे बचे, कैसे करें अपनी रक्षा, जाने कानून क्या कहता है
कम्प्लेन के जरूरी फैक्टर्स पर्सनल डिटेल्स
कम्प्लेन के अंदर कुछ जरूरी फैक्टर्स होते है जो पीड़ित को कम्प्लेन करते समय याद रखने चाहिए। सबसे पहली बात कि पीड़ित द्वारा दी जाने वाली कम्प्लेन लिखित रूप में होनी चाहिए और इसमें यह सभी निम्नलिखित डिटेल्स भी शामिल होनी चाहिए।
- पीड़ित का नाम
- पीड़ित का पता/एड्रेस
- पीड़ित से संपर्क करने की डिटेल्स जैसे फोन नंबर।
इसे भी पढ़े :-क्या आप पत्नी के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज़ करा सकते हैं?, जाने भारतीय कानून में क्या कहती हैं
घटना की डिटेल्स
- घटना क्या थी मतलब पुलिस ने नागरिक के साथ क्या गलत किया।
- घटना कब हुई
- किसके बारे में कम्प्लेन है मतलब जिस ऑफ़िसर ने दुर्व्यवहार किया है उसका नाम, कार्यस्थल आदि।
- घटना के गवाह की डिटेल्स, नाम, पता, अगर कोई गवाह है तो। के समय कोई और था (गवाह) और उनसे कैसे संपर्क करें (यदि आप यह हैं)
- अगर कोई शारीरिक या सामान का नुक्सान हुआ है तो उसकी डिटेल्स और प्रूफ।
- कुछ जरूरी और प्रासंगिक दस्तावेज़, जिन्हें आप अपनी कम्प्लेन के साथ अटैच कर सकें, यह आपकी कम्प्लेन को और ज्यादा महत्व दिलाएगा।