भोपाल
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कृषि महाविद्यालय रीवा में विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और कृषि में नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। हम वर्तमान में विपुल अन्न और फल सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया है, जिसके कारण धरती माता बीमार हो गई हैं। धरती माता को स्वस्थ रखना और भावी पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने के लिए प्राकृतिक खेती इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है । गोपालन पर आधारित प्राकृतिक खेती से ही हमें अच्छे स्वास्थ्य की नेमत मिलेगी। हर किसान अपनी कुल जमीन के दस प्रतिशत भाग पर प्राकृतिक विधि से अनाज फल और सब्जी का उत्पादन करें जिससे कम से कम उसके परिवार को रसायन रहित पौष्टिक आहार मिल सके। सेमिनार का आयोजन कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, एकेएस यूनिवर्सिटी तथा श्याम दुलारे तिवारी शिक्षा एवं शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही देश के गृहमंत्री अमित शाह जी ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अन्न उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऐसी किस्म का विकास करें जिससे माटी की उर्वरा शक्ति बनी रहे, धरती बीमार न हो और पौष्टिक अनाज से हम सब भी स्वस्थ रहें। समारोह में सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर प्राकृतिक खेती तथा अनाज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विधि से बनाई गई खाद तथा कीटनाशकों का उपयोग करना होगा, जिससे धरती का स्वास्थ्य और मानव के लिए हितकारी जीवाणु, कीट और पक्षी रह सकें। सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर पी.के. मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने हमें प्रकृति की ओर लौटने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हमारा अस्तित्व तभी तक है जब तक हम प्रकृति के अनुसार आचरण करेंगे। निर्माण कार्यों, बड़े बांध, खनन परियोजनाओं से वनों का विनाश होने के साथ-साथ खेती की जमीन घट रही है। साथ ही पूरी दुनिया में जल संकट की आहट है। युवा, कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के कंधों पर इन संकटों को दूर करने की जिम्मेदारी है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सोच समझकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती के साथ गोपालन को जोड़ा और धरती तथा गौ को माता के समान आदर दिया। हमें पुन: उसी तरफ चलने की आवश्यकता है। सेमिनार में उप मुख्यमंत्री ने कृषि महाविद्यालय की पत्रिका हरियाली, प्राकृतिक खेती की पुस्तिका तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती एवं 17 शोध पत्रों के संकलन का विमोचन किया।
सेमिनार में एकेएस विश्वविद्यालय के चांसलर अनंत सोनी ने ऊर्जा संरक्षण तथा खेती में नवाचार के संबंध में विचार व्यक्त किए। कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एसके त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती के लिए महाविद्यालय में किए जा रहे शोध की जानकारी दी। सेमिनार में प्रोफेसर डॉ. आरके तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में एके जैन, डॉ. एसके पाण्डेय, प्रोफेसर एके शर्मा तथा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता शामिल हुए। सेमिनार में आठ राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।