भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की तरह छत्तीसगढ़ राज्य में एक बहुत शानदार प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है। इस प्रोग्राम का नाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ है।
इसे पूरे राज्य में बिहान योजना के नाम से भी जाना जाता है। Bihan Yojana मूल रूप से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में आजीविका की गारंटी विकल्प के रूप में सामने आई है। इस योजना के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में विभिन्न प्रकार के रोजगार का सृजन व आजीविका के नये नये साधन पैदा किये जा रहे हैं।
कई मायनों में छत्तीसगढ़ बिहान योजना ने भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके पीछे का मुख्य कारण राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश वघेल की दूर दृष्टि को जाता है, जिन्होंनें छत्तीसगढ़ की योजनाओं को इस प्रकार बनाने में मदत की है, जो लोगों के लिये व्यवहारिक तथा लाभकारी साबित हो रही हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के द्धारा भी बिहान स्कीम को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ वासियों को बहुत लाभ पहुंच रहा है।
छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के द्धारा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन चलाया जा रहा है। इस मिशन को ही बिहान योजना के नाम से जाना जाता है।
बिहान मिशन छत्तीसगढ़ विशुद्ध रूप से छत्तीसगढ़ राज्य की महत्वाकांक्षी योजना है। जिसे भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समर्थन तथा सहायता प्राप्त होती है।
बिहान छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन NRLM के तहत राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बना कर रोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिये प्रेरित किया जाता है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने CG बिहान योजना के तहत NRLM के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी है। ग्रामीण महिलाओं के समूह गठन में सहायता व मार्गदर्शन करते हैं।
CG राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बिहान योजना वैकेंसी निम्न प्रकार होती हैं, इन खाली पदों पर समय समय पर राज्य सरकार भर्तियों के लिये आवेदन पत्र आमंत्रित करती है।
- रूबर्न विशेषज्ञ
- डाटा इंट्री ऑपरेटर सह लेखपाल
- क्षेत्रीय समन्वयक भर्ती पद
- भृत्य पात्र
- लेखा सह एम.आई.एस
- कार्यालय सहायक डाटा इंट्री ऑपरेटर आदि
इस योजना के अंतर्गत बिहान बाजार भी संचालित किये जा रहे हैं। इन बाज़ारों में महिला स्वयं सहायता समूहों के द्धारा बनाये गये उत्पादों के साथ साथ रोजमर्रा के लिये जरूरी सामानों की बिक्री की जाती है। यह बाजार छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन के द्धारा वित्त पोषित होते हैं। बिहान योजना के तहत छत्तीसगढ़ की महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। ताकि महिलाओं की आर्थिक तरक्की हो सके और वह अपने परिवार की उचित देखभाल करने के साथ साथ, अच्छा व खुशहाल जीवन बिता सकें।
बिहान मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलकों में रहने वाले परिवारों की आय में वृद्धि करके सालाना 1 लाख रूपये के पार ले जाना है।
ग्रामीण इलाकों में विकास व रोजगार के लिये जरूरी अधोसरंचना उपलब्ध कराना है।
स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाओं का सर्व भौमिक सामाजिक संगठन तथा सामुदायिक संस्थाओं का गठन करके उनका मार्गदर्शन करना।
योजना के अंतर्गत समूहों का संघ बना कर महिलाओं को व्यापक मौके प्रदान करना।
बिहान योजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के द्धारा विभिन्न प्रकार के स्वयं सहायता समूह बनाये जाते हैं। जिन्हें NRLM के अधिकारियों व कर्मचारियों के द्धारा शिविर लगा कर Training दी जाती है।
इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन प्रत्येक जिले में किया जाता है। इन शिविरों में स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय महिलाओं को 14 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है। इन शिविरों में स्वयं सहायता समूहों को साप्ताहिक बैठक, संपूर्ण टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, सुपोषित परिवार, Saving, आंतरिक लेन-देन, उधार वापसी, हिसाब-किताब संधारण, खुले में शौच मुक्त परिवार, सुनिश्चित परिवार, नशामुक्त परिवार से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
साथ ही ऋण पुस्तिका, रजिस्टर, बहीखाता (लेजर रजिस्टर), व्यक्तिगत पास तथा मासिक प्रतिवेदन तैयार करने का भी प्रशिक्षण (Training) दिया जाता है।
बिहान मिशन छत्तीसगढ़ के अंतर्गत Panch Sutra स्वयं सहायता समूहों के लिये
- नियमित साप्ताहिक बैठक
- नियमित साप्ताहिक बचत
- 3 नियमित आंतरिक लेनदेन
- सही हिसाब किताब
- नियमित उधार वापसी
बिहान मिशन के अंतर्गत सक्रिय महिला क्या काम करती है
Bihan Yojana के अंतर्गत सक्रिय महिला किसे कहा जाता है व वह क्या काम करती है से संबंधित Information यह है कि स्वयं सहायता समूहों (SHG) की ऐसी महिलायें जो अपने समूह में समूह व गांव के विकास के लिये सबसे ज्यादा योगदान व समय देती हैं, उन्हें बिहान योजना सक्रिय महिला कहा जाता है। इन महिलाओं को ही सबसे पहले छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका एवं रोजगार मिशन के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है। किसी स्वयं सहायता समूह की कमान एक सक्रिय महिला के हाथ में ही सौंपी जा सकती है।
बिहान ग्राम संगठन किसे कहते हैं
योजना के तहत एक ही गांव अथवा 2 से ज्यादा गांवों में गठित 6 से ज्यादा समूह जो बिहान पंचसूत्र नियम का पालन कर रहे हैं, को मिला कर आपस मिल कर बनाया गये संगठन को ग्राम संगठन के तौर पर जाना जाता है।
Bihan Yojana के अंतर्गत 11 सूत्रीय प्रशिक्षण कैसे दिया जाता है?
CG Bihan Scheme के अंतर्गत 11 सूत्रीय प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों का आपस में परिचय प्राप्त करना, सहज व सरल माहौल का निर्मांण करना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षक 2-2 प्रतिभागियों की जोड़ी बना कर उनसे एक दूसरे के बारे में व्यक्तिगत, पारिवारिक, काम व अनुभव आदि के विषय में जानकारी जुटाने को कहते हैं। जब यह जानकारी एक महिला हासिल कर लेती है तो उसे लिखित रूप से प्रस्तुत करने को कहा जाता है।
साथ ही परिचय सत्र के द्धारा महिलाओं को विभिन्न समूहों की महिलाओं से परिचय प्राप्त करने का निर्देश दिया जाता है। यह सत्र महिलाओं को एक दूसरे के अनुभव से कुछ सीखने व खुल कर बात करने को प्रोत्साहित करता है।
इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बलौदा अंतर्गत ग्राम सिवनी निवासी श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। कभी पूर्णतः घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली रूखमणी पाण्डेय आज प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
कोरोना काल एवं लॉकडाउन के दौरान पशुपालन व्यवसाय में हुए आर्थिक नुकसान के बाद परिवार की आय का प्रमुख स्रोत प्रभावित हुआ, जिससे आर्थिक चुनौतियां बढ़ीं। इस कठिन समय में श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।
आरबीके दीदी के सहयोग से ग्राम सिवनी में महिलाओं को संगठित कर उन्होंने ‘जय अम्बे महिला स्व सहायता समूह’ का गठन किया। 25 फरवरी 2020 को गठित यह समूह उन्नति महिला ग्राम संगठन सिवनी तथा बिहान महिला क्लस्टर संगठन कुरदा से संबद्ध है। समूह के माध्यम से बैंक लिंकेज के तहत एक लाख रुपये का ऋण तथा अतिरिक्त समूह ऋण प्राप्त कर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन व्यवसाय को पुनः प्रारंभ किया। इसके साथ ही आचार, पापड़, मसाला एवं अगरबत्ती निर्माण जैसी विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाया, जिससे उनकी आय में सतत वृद्धि हुई।
आज श्रीमती रूखमणी पाण्डेय न केवल अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को स्वयं पूरा कर रही हैं, बल्कि स्व सहायता समूह की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की अनेक महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं।
श्रीमती रूखमणी पाण्डेय ने कहा कि ‘लखपति दीदी पहल’ ने उन्हें आत्मविश्वास, पहचान और सम्मान प्रदान किया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी सफलता यह प्रमाणित करती है कि प्रभावी मार्गदर्शन, समूह की सामूहिक शक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती हैं।