त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम को हाई कोर्ट ने माना वैध , 20 साल बाद आया फैसला

Johar36garh (Web Desk)| छत्तीसगढ़ में 20 सालों की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार हाईकोर्ट ने त्रिवर्षीय चिकित्सा पाठ्यक्रम वैध करार दिया है | साथ ही कोर्ट ने छत्तीसगढ़ चिकित्सा मंडल की संवैधानिकता को भी बरकरार रखा है । साथ ही कहा है कि राज्य शासन स्वास्थ्य संबंधी नीतिगत निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
आपको बता दे तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार ने वर्ष 2001 में राज्य शासन ने दूरस्थ सुदूर ग्रामीण अंचलों में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए छत्तीसगढ़ चिकित्सा मंडल एक्ट की स्थापना की। जिसके तहत प्रैक्टिशनर इन मॉडर्न एंड होलिस्टिक मेडिसीन (पीएमएचएम) पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई थी। जिसे राज्य के दो बड़े विश्वविद्यालय पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर एवं गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के माध्यम से मान्यता दी गई थी। पाठ्यक्रम की शुरुआत के साथ ही यह विवादों के घेरे में आ गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इसका विरोध किया और छत्तीसगढ़ चिकित्सा मंडल एक्ट को केंद्रीय एमसीआई एक्ट 1956 के तहत असंवैधानिक बताते हुए इसे अल्ट्रावाइरस घोषित करने तथा चिकित्सा मंडल भंग करने के लिए हाई कोर्ट में राज्य शासन के खिलाफ याचिका दायर की थी ।

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इस याचिका में 20 वर्षों तक दोनों पक्षों के बीच हुई बहस और सभी मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट में अंतिम निर्णय में छत्तीसगढ़ चिकित्सा मंडल को संवैधानिक माना और कहा कि राज्य शासन स्वास्थ्य संबंधित नीतिगत निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।आठ साल पहले दायर हुई थी एक और याचिकावर्ष 2012 में शासकीय चिकित्सक संघ ने भी इस पाठ्यक्रम के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि राज्य शासन ने नियम विरुद्घ 741 चिकित्सा अधिकारियों के पद को विलोपित करते हुए ग्रामीण चिकित्सा सहायक के रेगुलर पद का सृजन कर दिया है। याचिका में इस पद को विलोपित करने की मांग की थी । इसमे भी हाईकोर्ट ने अंतिम निर्णय में आरएमए के पद को पूर्ववत रखा है ।(ए)