विविधता में एकता से सशक्त होता भारत : राज्यपाल पटेल
राज्यों की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का उत्सव
लोकभवन में मना चार राज्यों का संयुक्त स्थापना दिवस समारोह
भोपाल
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह केवल प्रशासनिक इकाइयों के गठन का स्मरण नहीं, बल्कि भारत की संघीय संरचना, सांस्कृतिक समृद्धि और राष्ट्रीय अखंडता के उत्सव का पावन प्रसंग है। उन्होंने “विविधता में एकता” को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” का संकल्प इसी भावना की जीवंत अभिव्यक्ति है।
राज्यपाल श्री पटेल मणिपुर, मेघालय और उत्तर प्रदेश राज्यों के संयुक्त स्थापना दिवस समारोह को शनिवार को लोकभवन में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्यों के स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल को निदेशक राष्ट्रीय मानव संग्रहालय प्रो. अमिताभ पांडेय ने चित्रकार दोरेन सिंह द्वारा निर्मित केनवास पेंटिंग “पुंग चोलम ऑफ मणिपुर” भेंट की। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे।
राज्यपाल श्री पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” अभियान ने देश की विविधताओं को एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्रीय एकता को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर 1 नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व के आयोजन में देश के सभी राज्यों की संस्कृतियों को एक मंच पर लाया जाता है। एकता नगर गुजरात में हुए गत वर्ष के समारोह में 11 नवम्बर को मध्यप्रदेश, मणिपुर एवं मेघालय का संयुक्त समारोह आयोजित हुआ था। इसमें राज्यों के राज्यपाल एवं मंत्री शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस का यह संयुक्त आयोजन इस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद हमारी आत्मा, चेतना और संस्कार एक हैं। उत्तर भारत की आध्यात्मिक चेतना, पूर्वोत्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और पश्चिमी भारत की समुद्री विरासत का संगम भारत को विश्व मंच पर एक सशक्त और प्रेरक राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है। राज्यपाल श्री पटेल ने स्थापना दिवस को क्षेत्रीय अस्मिताओं के सम्मान और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करने के सामूहिक संकल्प का विशेष प्रसंग बताया। उन्होंने विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। सभी नागरिकों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भारत की सांस्कृतिक विविधता को गौरव के रूप में अपनाने और “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया।
राज्यों के संयुक्त स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्यमंत्री, जेल विभाग श्री दारा सिंह ने मध्यप्रदेश में रह रहे उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए बधाई दी। उन्होंने मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश की लोक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रस्तुतियों को देखकर ऐसा लगा मानो वे स्वयं उन राज्यों में पहुँच गए हों। उन्होंने बताया कि देश के 50% एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में हैं, तीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हैं और अयोध्या में चौथा बन रहा है। नोएडा मोबाइल निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुका है। उन्होंने लोकभवन में समारोह आयोजन के लिए राज्यपाल के प्रति आभार ज्ञापित किया।
राज्यों के संयुक्त समारोह में मणिपुर के राज्यपाल श्री अजय कुमार भल्ला और मेघालय के राज्यपाल श्री सी.एच. विजयशंकर के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश राज्यों की संस्कृति, सभ्यता और विकास को दर्शाती लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। मणिपुर राज्य की ओर से "दि गोल्डन लैंड ऑफ लियंगमई" लोक गीत की प्रस्तुति दी गई। गीत के माध्यम से लियंगमई जनजाति, अपनी पूर्वजों की भूमि को 'स्वर्ण भूमि' के रूप में सराहा गया। लोक नृत्य “थोगल जागोई” की प्रस्तुति दी गई। मेघालय राज्य की ओर से लोक गीत "पोर तमास" गीत की प्रस्तुति दी गई, जिसमें पारंपरिक वाद्यों की गूंज के संगम में अद्भूत समा बांध दिया। उत्तर प्रदेश राज्य की प्रस्तुति में प्रदेश की विभिन्न संस्कृतियों के लोक गीतों छठ पूजा, कजरी, जट-जटिन, रासलीला, होरी और फगुआ के मोतियों को एक माला में पिरोते हुए राज्य की सांस्कृतिक वैभव को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का संचालन आभा शुक्ला ने किया।
इस अवसर पर लोकभवन के अधिकारी, स्थापना दिवस समारोह से संबंधित राज्यों के मध्यप्रदेश वासी उपस्थित थे।