विष्णु के शासन में अराजकता, पुलिस का खौफ खत्म, घर घुसकर पूरे परिवार के साथ मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी, सब कुछ फूंका

छत्तीसगढ़ सरकार भले ही प्रदेश में सुशासन की बात कह रही हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। प्रदेश में जब से विष्णु देव साय की सत्ता आई है तब से अराजकता फैली हुई है। आए दिन बड़ी-बड़ी घटनाएं छत्तीसगढ़ में होती जा रही है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार खामोश बैठ सुशासन के राग अलाप रही है।

हाल ही घटना शक्ति जिला के मालखरौदा थाना से निकलकर आ रही है| जिसमें ग्राम गोरखापाली में बड़ी संख्या में लोग ने एक घर में घुसकर तहस-नस कर देते हैं। गाड़ियों को आग के हवाले कर देते हैं। घर के लोगों को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।

हैरत की बात है कि जब मौके पर पुलिस की 112 टीम पहुंची तो उसे भी गांव वालों ने भगा दिया। पुलिस प्रशासन तीन-चार घंटे तक खामोश बैठी रही और उपद्रवी लोग घर में तबाही मचाते रहे और कानून व्यवस्था के साथ खेलते रहे|  आरोप है की इन सब के साथ गाँव के मुखिया सरपंच पति भी दे रहे थे | सब कुछ खत्म होने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शांतिपूर्ण माहौल बनाने का प्रयास करने लगी।

दरअसल यह लड़ाई दो लोगों के बीच की थी जिसमें एक सिदार कोटवार का कुर्रे परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई बात को लेकर जमकर मारपीट हुई थी | जिसमें कोटवार सीदार को गंभीर चोट आई थी | उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया जहां उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गौर करने वाली बात है दो लोगों की लड़ाई में एक पक्ष का साथ दे देते हुए गांव के लोग बड़ी संख्या मे दूसरे पक्ष के घर घुस जाते हैं और उसके पूरे परिवार के साथ मारपीट करते हैं। घर को तहस नहस करते हुए आग के हवाले कर देते हैं | उनका टेंट और डीजे का कारोबार था उसे पूरी तरह उजाड़ दिया |पीड़ित महिला के अनुसार अब उनके पास कुछ भी नहीं बचा है जो उनके तन पर कपड़े हैं बस वही हैं ना ही उनके पास पैसा है, ना गहना बचा है, ना ही राशन है और नहीं वाहन है। उनका सब कुछ जला दिया गया |

पूरी घटना होली के दिन की है। पुलिस प्रशासन होली में हुडदंगियों से निपटने के लिए अपने ताकत लोगों के सामने दिखती है। शहर गाँव मे मार्च कर लोगों को सचेत करती है कि कोई भी अगर बदमाशी किया तो उनके साथ बहुत ही शक्ति के साथ पेश आएंगे। लेकिन शक्ति जिला में पुलिस की इस शक्ति प्रदर्शन और चेतावनी का रत्ती भर भी फड़क लोगों पर नहीं पड़ा।

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सोशल मीडिया में दिखाई दे रहा वीडियो बहुत ही भयानक और डरा देने वाली है। घर के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ खड़ी होकर गाली-गलौज दे रही है। घर के दरवाजों को लाठी डंडे से तोड़ा जाता है| घर और दुकान में रखे सामान को धीरे-धीरे बाहर निकाल कर सड़कों पर फेंककर तोड़ा जा रहा है।

 

 

खुद ही न्याय करने निकले गांव के लोग, क्या पुलिस पर विश्वास नहीं

इस घटना को देखने के बाद एक आम आदमी के मन में एक सवाल खड़ी कर रहा है। गुनाह की सजा स्वयं ही देने को निकले हैं। क्या इन लोगों को कानून पर से विश्वास उठ गया है या फिर कानून का डर उनके मन से उठ गया है। यह बड़ा सोचने का विषय है | छत्तीसगढ़ को सबसे शांत प्रिय माना जाता था लेकिन कुछ समय से छत्तीसगढ़ की फिजा बदल गई है। छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में एक समूह स्वयं ही इंसाफ करने निकल जाता है। जिसका परिणाम यह निकलता है कि एक परिवार इनका शिकार हो जाता है।

 

 

शराब बनी इस वारदात की वजह

गांव वालों के अनुसार इस वारदात की मुख्य वजह शराब हीं बनी है | गांव वालों के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है| पीड़ित पक्षों के द्वारा शराब बेची जा रही थी| इस संबंध में गांव के लोगों द्वारा बार-बार मना किया गया था| उसके बावजूद यह लोग शराब बिक्री करना बंद नहीं कर रहे थे। इसी शराब बंद करने की बात को लेकर कोटवार के साथ विवाद हुआ था | इसके बाद नौबत मारपीट किया गई। किंतु सोचने वाली बात है कि छत्तीसगढ़ में शराब की अवैध बिक्री को रोकने के लिए आबकारी व पुलिस की टीम हमेशा तैयार रहती है। लगातार दोनों टीमों द्वारा गांव में चल रहे इस गोरख धंधा के खिलाफ छापेमार कार्यवाही कर रही है। गांव के लोगों को जब यह समस्या थी तो आसानी से आबकारी या पुलिस के पास जाकर शिकायत कर सकते थे लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया।

वर्चस्व की लड़ाई

गाँव के लोगों की बातें सुनने के बाद कुछ बातें ऐसी भी निकाल कर आई की गांव में पीड़ित पक्ष के समाज के लोगों की संख्या बहुत ही कम है, संभवत एक दो परिवार है। लेकिन धन संपदा की दृष्टिकोण से गांव में वह अलग महत्व रखता था। इस परिवार के पास सभी प्रकार के संसाधन वाहन उपलब्ध थे| जिसकी वजह से इन्हें किसी के सामने झुकना नहीं पड़ता था। उनके पास खेती से संबंधित सभी बड़े-बड़े उपकरण उपलब्ध थे। जिसमें ट्रैक्टर थ्रेसर पिकअप डीजे टेंट हाउस आदि शामिल है। जिसकी वजह से गांव के लोग इस परिवार से ईर्ष्या से रखते थे। इस वारदात की मुख्य वजह एक यह भी मानी जा रही है। कोटवार परिवार का उद्देश्य केवल उनके परिवार को भयभीत करना और अपना गुस्सा दिखाना था। लेकिन जो लोग इनसे ईर्ष्या रखते थे उनका उद्देश्य इनकी संपत्ति को क्षति पहुंचाना था | वे लोग इसी नीयत से इस वारदात को अंजाम दिए हैं। जिसके कारण घर का एक भी समान सबूत नहीं बचा है |

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पुलिस ने दोनों पक्ष के खिलाफ किया मामला दर्ज

घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। शक्ति जिला के पुलिस अधीक्षक ने प्रेस को बताया कि घटना की शुरुआत शराब पीने के बाद शुरू हुई। जिसके बाद दूसरे पक्ष में कोटवार के हाथ पैर और सिर पर डंडे से हमला कर दिया। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी स्थिति अभी गंभीर बनी हुई है । इस बात की जानकारी कोटवार के रिश्तेदारों और पड़ोसियों को हुई तब सभी मिलकर बड़ी संख्या में दूसरे पक्ष के घर पहुंच गए। इसके बाद उन लोगों के द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया है। एक पक्ष की शिकायत पर 115(2)-BNS, 191(1)-BNS, 296-BNS, 324(4)-BNS, 326(f)-BNS, 333-BNS, 351(3)-BNS और दूसरे पक्ष की शिकायत पर 109(1)-BNS, 115(2)-BNS, 296-BNS, 3(5)-BNS, 351(3)-BNS की कार्यवाही की गई |

 

 

 

धाराएं 

115(2)-BNS – स्वैच्छिक रूप से चोट पहुँचाने के लिए दंड निर्दिष्ट करती है। इस धारा के तहत जिम्मेदार व्यक्ति को कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।अधिकतम एक वर्ष का कारावास हो सकता है| जमानती और समझौता योग्य

191(1)-BNS – जब भी किसी गैरकानूनी सभा द्वारा, या उसके किसी सदस्य द्वारा, ऐसी सभा के सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है, तो उस सभा का प्रत्येक सदस्य दंगा करने के अपराध का दोषी होता है| 2 वर्ष तक का कारावास , या जुर्माना , या दोनों, जमानती

296-BNS – सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्यों के प्रदर्शन या अश्लील भाषा, गीतों या गाथागीतों के उपयोग से संबंधित है, जिससे दूसरों को असुविधा होती है। उसे तीन महीने तक के कारावास या 1,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा। जमानती

324(4)BNS – जानबूझकर या सोच-समझकर संपत्ति को अनुचित हानि या क्षति पहुंचाना। इसमें निजी, सार्वजनिक या सरकारी स्वामित्व वाली संपत्ति का विनाश, परिवर्तन या उसके मूल्य या उपयोगिता में कमी करना शामिल हो सकता है । 1,00,000 या उससे अधिक का नुकसान: 5 वर्ष तक की कैद , जुर्माना या दोनों। जमानती 

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326(f)-BNS – संपत्ति या भवनों को नुकसान पहुंचाने के लिए आग या विस्फोटकों का उपयोग करके उपद्रव करता है, उसे एक वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जाएगी, और कृत्य की गंभीरता के आधार पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। गैर-जमानती (क्योंकि इसमें पूजा स्थलों या आवासों को नष्ट करना शामिल है)

333-BNS, – यह कानून परिवारों और व्यक्तियों को उनके घरों के अंदर हिंसक घुसपैठ से सुरक्षा प्रदान करता है। जो कोई भी चोट पहुँचाने, हमला करने, गलत तरीके से रोकने या ऐसी कार्रवाइयों का भय पैदा करने की तैयारी के बाद घर में घुसपैठ करता है, उसे सात साल तक के कारावास की सजा दी जाएगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। गैर-जमानती → आरोपी जमानत को अधिकार के रूप में नहीं मांग सकता; इसके लिए न्यायालय की मंजूरी आवश्यक है।

351(3)-BNS – कोई व्यक्ति किसी को डराने या मजबूर करने के लिए धमकियों का इस्तेमाल करता है। इसमें जान, माल, मानहानि या प्रियजनों को धमकी देना शामिल है| मृत्यु, गंभीर चोट, आगजनी या गंभीर अपराधों से संबंधित धमकियाँ → 7 वर्ष जमानती

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109(1)-BNS – आरोपी का या तो जान से मारने का इरादा होना चाहिए या उसे यह पता होना चाहिए कि उसका कृत्य इतना खतरनाक है कि इससे मृत्यु हो सकती है। आजीवन कारावास या 10 वर्ष + जुर्मानापुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। जमानत आसानी से उपलब्ध नहीं है

115(2)-BNS – स्वैच्छिक रूप से चोट पहुँचाने के लिए दंड निर्दिष्ट करती है। इस धारा के तहत जिम्मेदार व्यक्ति को कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।अधिकतम एक वर्ष का कारावास हो सकता है| जमानती और समझौता योग्य

296-BNS – सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील कृत्यों के प्रदर्शन या अश्लील भाषा, गीतों या गाथागीतों के उपयोग से संबंधित है, जिससे दूसरों को असुविधा होती है। उसे तीन महीने तक के कारावास या 1,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा। जमानती

3(5)-BNS – जब कोई आपराधिक कृत्य कई व्यक्तियों द्वारा एक सामान्य इरादे से किया जाता है, तो प्रत्येक व्यक्ति उसी प्रकार उत्तरदायी होता है जैसे कि उसने वह कृत्य अकेले किया हो।

351(3)-BNS – कोई व्यक्ति किसी को डराने या मजबूर करने के लिए धमकियों का इस्तेमाल करता है। इसमें जान, माल, मानहानि या प्रियजनों को धमकी देना शामिल है| मृत्यु, गंभीर चोट, आगजनी या गंभीर अपराधों से संबंधित धमकियाँ → 7 वर्ष जमानती