लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने क्यों नहीं किए साइन? कांग्रेस ने बताई वजह

 नई दिल्ली

विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. अब विपक्षी ने लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंप दिया है. इसमें कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी जैसे दलों के करीब 120 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के नोटिस पर साइन किए हैं.

लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया है और मंगलवार को वह सदन की कार्यवाही का संचालन करने आसन पर नहीं आए.

अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किया है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को देखते हुए विपक्ष के नेता के द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करना ठीक नहीं है.

विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया. बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था. विपक्ष ने नोटिस में कहा है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी से कांग्रेस सदस्यों पर साफ़ तौर पर झूठे आरोप लगे.

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अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर से TMC का इनकार

संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में लगातार गतिरोध देखने को मिल रहा है. विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है. इसके चलते कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला से बेहद नाराज हैं. यही कारण है कि विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने जा रही है. हालांकि इस बार विपक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है. विपक्ष की सबसे प्रमुख पार्टियों में से एक तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्‍यक्ष के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं. तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ब्रह्मास्‍त्र का इस्‍तेमाल पहले क्‍यों किया जाए. 

लोकसभा अध्‍यक्ष के खिलाफ जब पूरा विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है, तृणमूल कांग्रेस ने अलग रुख अपनाया है. टीएमसी ने स्‍पीकर के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं. इसे लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सफाई दी है.

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स्‍पीकर को साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी: बनर्जी 

उन्‍होंने एनडीटीवी से कहा कि हमारी राय में पहले विपक्ष को अपनी मांगों को लेकर स्पीकर को एक साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी और तीन दिनों का समय देना चाहिए था. 

पहले ही ब्रह्मास्‍त्र का इस्‍तेमाल क्‍यों करें: बनर्जी 

उन्‍होंने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं होती तो फिर तीन दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देना चाहिए था, तब टीएमसी भी इसमें साथ देती. उन्‍होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव आखिरी कदम है, पहले ही ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल क्यों करें.

अभिषेक बनर्जी चाहे कोई भी तर्क दें, लेकिन इससे संदेश ठीक नहीं है. जानकार कहते हैं कि विपक्षी एकता की बात करने वाले इंडिया गठबंधन के दलों के बीच इस तरह की स्थिति बताती है कि ऐसे मतभेद सामूहिक प्रयासों को ही कमजोर करते हैं. 

विपक्ष क्यों लेकर आई अविश्वास प्रस्ताव

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि स्पीकर सदन में पक्षपाती रवैया अपनाते हैं। विपक्ष की आवाज को दबाया जाता है। प्रियंका गांधी ने कहा कि स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।

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'बहुत ही जरूरी कदम…'

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर बी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा रखा है. माननीय स्पीकर का पर्सनल सम्मान करते हुए भी, हम विपक्षी MPs को पब्लिक इंपॉर्टेंस के मुद्दे उठाने का मौका लगातार न देने से दुखी और परेशान हैं. कई सालों के बाद, स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया गया है. यह एक बहुत ही जरूरी कदम है."