पत्नी मायके चली जाए और वापस ससुराल नहीं आए, इस स्थिति में पति क्या करें, जाने कानून क्या कहता है

पत्नी मायके चली जाए और वापस ससुराल नहीं आए, इस स्थिति में पति क्या करें, जाने कानून क्या कहता है : जब एक विवाहित महिला अपने मायके जाती है और फिर वापस आने से मना कर देती है, तो यह न सिर्फ पति के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए मानसिक तनाव का कारण बनता है। पति परेशान होता है, रिश्ते को बचाने की कोशिश करता है, लेकिन कई बार भावनाओं में बहकर कानूनी अधिकारों की अनदेखी कर बैठता है।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि ऐसे हालात में पति को क्या करना चाहिए, किन कानूनी रास्तों का सहारा लिया जा सकता है और कैसे रिश्ते को सम्मान के साथ संभाला या सुलझाया जा सकता है।

 

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पहले समझिए – पत्नी के लौटने से इनकार के संभावित कारण

  • पारिवारिक विवाद: जब सास-ससुर, जेठ या देवर से अनबन या बुरा बर्ताव, जिससे पत्नी को घर में असुरक्षित महसूस होता है।
  • घरेलू हिंसा का आरोप: मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप, जैसे मारपीट, ताना मारना या डराना-धमकाना।
  • पति का बर्ताव: अगर पति शक करता है, समय नहीं देता या गाली-गलौज करता है, तो पत्नी दूरी बना लेती है।
  • आर्थिक तनाव: पति बेरोजगार हो या पत्नी से दहेज की अवैध मांग करे, तो महिला मानसिक रूप से टूट जाती है।
  • मायके वालों का दखल: मायकेवाले पत्नी पर घर न लौटने का दबाव डालते हैं, खासकर अगर रिश्ते में दरार हो गई हो।
  • आपसी संवाद:पति-पत्नी के बीच खुली और ईमानदार बातचीत रिश्ते में विश्वास और समझ बढ़ाती है। यह एक दूसरे के दृष्टिकोण को समझने और समस्याओं को मिलकर हल करने का पहला कदम है।
  • मेडिएशन: यह एक स्वैच्छिक और गोपनीय प्रक्रिया है, जिसमें एक तटस्थ मीडिएटर दोनों पक्षों के बीच संवाद को सुविधाजनक बनाता है। मीडिएटर का उद्देश्य पक्षों को समझौते तक पहुँचने में मदद करना है, न कि निर्णय देना। यह प्रक्रिया त्वरित, किफायती और कम तनावपूर्ण होती है।
  • फैमिली काउंसलिंग: यह एक पेशेवर काउंसलर द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा है, जो परिवारिक समस्याओं के समाधान में मदद करती है। काउंसलर परिवार के सदस्यों के बीच संवाद सुधारने, भावनात्मक मुद्दों को समझने और रिश्तों को मजबूत करने में सहायता करता है।

पत्नी मायके चली जाए और वापस ससुराल नहीं आए, इस स्थिति में पति क्या करें, जाने कानून क्या कहता है : इन तीनों उपायों का उद्देश्य परिवारिक समस्याओं का समाधान करना और रिश्तों को सशक्त बनाना है। यदि ये उपाय सफल नहीं होते, तो कानूनी रास्ते पर विचार किया जा सकता है।

 

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पत्नी अगर बिना उचित कारण के लौटने से मना करे तो क्या करें?

1. पत्नी का बिना उचित कारण लौटने से मना करना: क्या यह ‘क्रूरता’ है?

  • यदि पत्नी बिना किसी न्यायसंगत कारण के अपने पति के साथ रहने से मना करती है, तो इसे न्यायालय मानसिक और भावनात्मक क्रूरता के रूप में देख सकता है।
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में इसे हिंदू विवाह की आत्मा और भावना की मृत्यु करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक एक-दूसरे से अलग रहना और बिना कारण के साथ न लौटना मानसिक और भावनात्मक क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है।

2. रेस्टिट्यूशन ऑफ कॉनजुगल राइट्स क्या है?

यह हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 9 के तहत एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत यदि पति या पत्नी बिना किसी उचित कारण के दूसरे से अलग रहते हैं, तो दूसरा पक्ष कोर्ट में पेटिशन दायर कर वैवाहिक सहवास की पुनः प्राप्ति की मांग कर सकता है। कोर्ट यदि यह मानती है कि कोई उचित कारण नहीं है, तो वह आदेश पारित कर सकती है।

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कोर्ट में पेटिशन कैसे फाइल करें?

  • पेटिशन  कैसे दायर करें? पेटिशन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर की जाती है, जहां पत्नी ने बिना उचित कारण से अलगाव किया हो। पेटिशन में विवाह की तारीख, दोनों पक्षों का विवरण, और अलगाव के कारणों का उल्लेख करना आवश्यक है। पेटिशन  में यह भी प्रमाणित करना होता है कि पेटिशन  में कोई धोखाधड़ी नहीं है और इसमें कोई विलंब नहीं हुआ है।
  • आवश्यक दस्तावेज: पेटिशन में विवाह प्रमाण पत्र, दोनों पक्षों के निवास स्थान का विवरण, और विवाह के बाद की सहवास की जानकारी शामिल होनी चाहिए। पेटिशन  में यह भी उल्लेख करना होता है कि कोई कानूनी कारण नहीं है जिसके कारण पेटिशन खारिज की जाए।
  • कोर्ट की भूमिका और सुनवाई कैसे होती है? कोर्ट पेटिशन की जांच करती है और दोनों पक्षों से सुनवाई करती है। यदि कोर्ट यह संतुष्ट होती है कि पत्नी ने बिना उचित कारण के अलगाव किया है, तो वह पेटिशन को स्वीकार कर सकती है और पत्नी को घर वापिस आने का आदेश दे सकती है।

पत्नी मायके चली जाए और वापस ससुराल नहीं आए, इस स्थिति में पति क्या करें, जाने कानून क्या कहता है : पेटिशन  दायर करने से पहले एक विशेषज्ञ वकील से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है। वह आपको पेटिशन तैयार करने में सहायता करेंगे और कानूनी प्रक्रिया को समझने में मदद करेंगे। सही मार्गदर्शन से ही आप अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

अगर पत्नी कोर्ट आदेश के बाद भी वापस नहीं आती तो क्या विकल्प हैं?

कोर्ट अवमानना (Contempt of Court):

  • कोर्ट का आदेश न मानना कानूनन अपराध है और इसे कोर्ट का अवमानना माना जाता है।
  • पति कोर्ट में अवमानना पेटिशन दाखिल कर सकता है ताकि कोर्ट उचित सज़ा दे सके।
  • पत्नी पर जुर्माना, गिरफ्तारी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
  • कोर्ट आदेशों की अनदेखी न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
  • यह पति को न्याय पाने के लिए एक सशक्त कानूनी रास्ता प्रदान करता है।
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तलाक के लिए आधार कैसे बन सकता है?

  • यदि पत्नी 1 साल तक साथ रहने से इनकार करे तो पति तलाक की पेटिशन दाखिल कर सकता है।
  • वैवाहिक संबंधों का न होना मानसिक क्रूरता के रूप में स्वीकारा जाता है।
  • कोर्ट इसे “ईरीवर्टेबल ब्रेकडाउन ऑफ़ मैरिज” मानकर तलाक दे सकता है।
  • पति यह दिखा सकता है कि रिश्ते में सुधार की कोई संभावना नहीं है।
  • धारा 13(1)(ia) और 13(1A) के अंतर्गत तलाक का प्रावधान लागू किया जा सकता है।

क्या RCR पेटिशन फाइल करने से पहले लीगल नोटिस भेजना ज़रूरी है?

  • RCR पेटिशन  दायर करने से पहले लीगल नोटिस भेजना अनिवार्य नहीं है, यह कानूनन बाध्यकारी नहीं है।
  • लीगल नोटिस भेजना एक अच्छा अभ्यास है, जिससे पत्नी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलता है।
  • अगर पत्नी नोटिस का जवाब नहीं देती या वापस नहीं आती, तो आप RCR की पेटिशन  दायर कर सकते हैं।
  • नोटिस भेजने के बाद कम से कम 30 दिन प्रतीक्षा करें, ताकि पत्नी को सोचने और प्रतिक्रिया देने का समय मिले।
  • पेटिशन  दायर करने से पहले एक योग्य वकील से परामर्श लेना बेहतर होगा, ताकि प्रक्रिया सही ढंग से की जा सके।
  • कभी-कभी सिर्फ एक लीगल नोटिस मिलने पर ही पत्नी आपसी सहमति से वापस लौट सकती है, जिससे विवाद टल सकता है।
  • लीगल नोटिस भेजना कोर्ट में पेटिशन  दायर करने की तुलना में किफायती होता है, जिससे कानूनी खर्च कम हो सकता है।

बच्चों का मुद्दा – अगर बच्चे साथ में हैं तो क्या करें?

यदि बच्चे पति के पास हैं, तो उनका भरण-पोषण और देखभाल पति का कानूनी दायित्व है। यदि पत्नी बच्चों को मायके ले गई है, तो पति गार्डियन एंड वार्ड एक्ट, 1890 के तहत कोर्ट में पेटिशन दायर कर सकता है। अदालत बच्चों की भलाई को प्राथमिकता देती है और यदि आवश्यक हो, तो बच्चों को वापस लाने के लिए आदेश जारी कर सकती है।

कस्टडी के मामलों में कोर्ट बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देती है। पति को अपनी पेटिशन  में बच्चों की भलाई से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। कोर्ट बच्चों की उम्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती है।

रिना कुमारी बनाम दिनेश कुमार महतो (2025)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी ने रेस्टिट्यूशन ऑफ कॉनजुगल राइट्स के लिए दिए गए आदेश का पालन नहीं किया है, तो भी वह अपने पति से भरण-पोषण का अधिकार रखती है।

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कोर्ट ने माना कि यदि पत्नी को मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो, तो उसका अपने पति के साथ रहने से इनकार करना उचित कारण हो सकता है। इसलिए, पति को पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।

पूनम अंजुर पवार बनाम अंकुर अशोकभाई पवार (2023)

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई पत्नी अपने पति के साथ रहने से इनकार करती है, तो उसके खिलाफ दिए गए आदेश का पालन न करने पर उसे कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पत्नी के पास वैध कारण हैं, तो उसे भरण-पोषण का अधिकार मिल सकता है। इसलिए, पति को पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता, यदि पत्नी के पास वैध कारण हैं।

निष्कर्ष

वैवाहिक विवाद केवल कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी बहुत गहरे होते हैं। ऐसे में सबसे पहले रिश्ते को बचाने की ईमानदार कोशिश करनी चाहिए – संवाद, समझौता और काउंसलिंग के जरिए।

लेकिन अगर बार-बार अपमान, मानसिक तनाव या अन्याय हो रहा हो, तो आत्म-सम्मान और मानसिक शांति से समझौता नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में कानून का सहारा लेना आपका हक है – पर हमेशा संतुलन और समझदारी से, न कि बदले की भावना से।

 

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FAQs

1. अगर पत्नी बिना वजह मायके चली जाए तो क्या ये कानूनी गलती है?

हाँ, अगर कोई वैध कारण नहीं है तो यह मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है।

2. क्या हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 9 में केस करने से पत्नी वापस आ सकती है?

यह केस पत्नी को वापस लाने के लिए एक कानूनी विकल्प है, लेकिन यह 100% गारंटी नहीं है।

3. अगर पत्नी झूठे केस कर दे तो क्या करें?

पति को सबूत इकट्ठा करना चाहिए और अग्रिम ज़मानत लेनी चाहिए।

4. क्या पत्नी की गैरमौजूदगी में तलाक संभव है?

हां, अगर पत्नी मानसिक क्रूरता या बिना कारण के मायके जाती है तो तलाक लिया जा सकता है।

5. क्या सुलह के बाद पत्नी फिर से केस कर सकती है?

हां, सुलह के बाद भी वह नए आधार पर कानूनी कदम उठा सकती है, लेकिन यह उस पर निर्भर करता है कि सुलह के दौरान क्या समझौता हुआ था।

 

 

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