रोज़ाना साड़ी पहनने वाली महिलाएं हो रही पेटीकोट कैंसर की शिकार, शोध में आया सामने

नईदिल्ली
आजकल कैंसर कई लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। कई तरह के खतरनाक कैंसर सामने आ रहे हैं। महिलाओं में स्तन, गर्भाशय, योनि और अंडाशय के कैंसर आम हैं। लेकिन अब दो मामलों में पेटीकोट कैंसर पाया गया है! रोज़ाना साड़ी पहनने वालों के लिए यह चिंताजनक है। वर्धा के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और बिहार के मधुबनी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के हालिया शोध के अनुसार, रोज़ाना साड़ी पहनने वाली महिलाएं इससे पीड़ित हो रही हैं।

इसका कारण साड़ी के साथ पहने जाने वाला पेटीकोट है। अध्ययन में बताया गया है कि इसके धागे से खतरा बढ़ता है। हालांकि अध्ययन में सिर्फ़ साड़ी का ज़िक्र है, लेकिन चूड़ीदार और कुर्ता पहनने वालों को भी कमर पर धागा बांधना पड़ता है। इसे टाइट बांधने से कैंसर हो सकता है। पेटीकोट या पैंट का धागा टाइट बांधने से यह त्वचा से चिपक जाता है। साड़ी न खिसके इसलिए इसे टाइट बांधा जाता है। रोज़ाना साड़ी पहनने वालों में ऐसा करने से त्वचा लाल हो जाती है, सूज जाती है और बाद में घाव बनकर कैंसर का रूप ले सकती है।

शुरुआत में महिलाओं में पाए गए इस कैंसर के लिए साड़ी को ज़िम्मेदार माना गया था। लेकिन बाद में पता चला कि इसका कारण पेटीकोट है, इसलिए इसे पेटीकोट कैंसर कहा गया है। 70 साल की एक महिला में यह पाया गया। उनके पेट के आसपास घाव 18 महीने तक ठीक नहीं हुआ। बाद में पता चला कि यह मार्जोलिन अल्सर नाम का त्वचा कैंसर है। फिर एक और महिला में भी यह पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, पेटीकोट टाइट बांधने से पेट और कमर पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे घर्षण होता है और त्वचा कमज़ोर हो जाती है। इससे घाव या छाले हो जाते हैं। इलाज न कराने पर यह कैंसर में बदल सकता है।

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इस तरह के घाव या छाले होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। रोज़ाना साड़ी या धागे वाला पेटीकोट पहनने वालों को इलास्टिक वाला पेटीकोट पहनने की सलाह दी जाती है। या फिर ढीले स्कर्ट पहनने को कहा गया है। कमर के आसपास हफ़्तों या महीनों तक ठीक न होने वाले घाव होने पर तुरंत जांच कराएं।

70 साल की महिला में साड़ी से हुआ कैंसर

पहले मामले में, एक 70 वर्षीय महिला को अपने दाहिने हिस्से में त्वचा पर एक अल्सर विकसित हो गया, जिसमें त्वचा का रंग भी फीका पड़ गया था। पेटीकोट की तंग डोरी ने त्वचा को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया, जिससे मार्जोलिन अल्सर हो गया।

70 वर्षीय महिला ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि, ‘मैंने दशकों तक खूब कसी साड़ी बांधी, मुझे नहीं पता था कि ये मेरी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। त्वचा में हल्का सा बदलाव हुआ जो धीरे-धीरे दर्दनाक और ठीक न होने वाले अल्सर में बदल गया, बाद में पता चला कि मुझे स्‍किन कैंसर हुआ है।’

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डॉ. दर्शना राणे के अनुसार, ‘जब यह नाड़ा लगातार एक ही स्थान पर कमर पर बांधा जाता है, तो इससे त्वचा में जलन (डर्माटोसिस) होती है, जिससे आगे चलकर अल्सर (घाव) या ‘मार्जोलिन अल्सर’ बन सकते हैं, और बहुत ही दुर्लभ मामलों में, ये घाव कैंसर में बदल सकते हैं।’

ऐसे पहचाने ‘साड़ी कैंसर’ का लक्षण

‘साड़ी कैंसर’ के शुरुआती लक्षण पेटीकोट का तंग नाड़ा लंबे समय तक जलन पैदा कर सकता है। इंडिया की गर्मी में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, यह समस्या तेजी से बढ़ सकती है। कसी साड़ी से त्वचा का रंग बदलना या हल्की पपड़ी पड़ना गंभीर लक्षण हो सकते हैं।

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

डॉ. दर्शना राणे बताती हैं, पेटीकोट का नाड़ा जब गर्म और आर्द्र मौसम में कसकर बांधा जाता है, तो यह पसीना और धूल के जमा होने से जलन और खुजली पैदा कर सकता है।

ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के कारण, महिलाएं प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और जब हेल्‍थ खराब हो जाती है तब डॉक्‍टर को दिखाती हैं।

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चूड़ीदार और धोती से भी हो सकता है कैंसर

जी हां, अगर आप कस कर धोती बांधते हैं और महिलाएं अगर टाइट चूड़ीदार पहनती हैं, तो आपको भी बच कर रहना चाहिए। हालांकि यह एक दुर्लभ समस्या है, लेकिन यह जागरूकता और बचाव की आवश्यकता को दर्शाती है।

जानें बचाव का तरीका

पेटीकोट को बहुत कसकर न बांधें, खासकर अगर त्वचा में रंग बदलने या पपड़ी बनने जैसे डर्माटोसिस के शुरुआती संकेत दिखें।
पेटीकोट में चौड़ा कमरबंद इस्तेमाल करने से कमर पर दबाव समान रूप से बंटता है।
पेटीकोट को बांधने की ऊंचाई समय-समय पर बदलते रहें। घर पर हों तो ढीले इलास्टिक वाले पतलून पहनें ताकि हवा का संचार बना रहे।
कभी भी टाइटप कपड़ा ना पहनें। हमेशा आरामदायक कपड़ा ही पहनें। कमर पर टाइट बेल्‍ट या नाड़ा ना बांधें। स्‍किन पर अगर इलास्‍टिक से जलन और खुजली हो तो तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं।