गौसेवा में समर्पित योगी सरकार, प्रदेश के 4366 गौ-आश्रय स्थलों पर सुदृढ़ निगरानी

गौसेवा में समर्पित योगी सरकार, प्रदेश के 4366 गौ-आश्रय स्थलों पर सुदृढ़ निगरानी 

65 जिलों के गौ-आश्रय स्थलों पर मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम लागू, शेष में प्रक्रिया जारी

20 जिलों के विकास भवनों में स्थापित केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से व्यवस्थाओं पर रखी जा रही सतत नजर

ठंड, भोजन, उपचार और आश्रय की समुचित व्यवस्था, गोवंश संरक्षण को मिली रफ्तार

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के गौ-आश्रय स्थलों पर लगातार निगरानी, प्रबंधन और सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य तेज गति से जारी है। प्रदेश के 75 जनपदों के कुल 6718 ग्रामीण गौ-आश्रय स्थलों में से 65 जनपदों के 4366 गौ-आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। बाकी जनपदों में भी निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किए जाने की कार्यवाही प्रक्रिया में है। साथ ही प्रदेश के हरदोई, आगरा, जालौन सहित 20 जनपदों के विकास भवनों में केंद्रीकृत निगरानी कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं, जिसके माध्यम से आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं पर सतत नजर रखी जा रही है।

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गो-आश्रय स्थलों को यूपी सरकार दे रही है मूलभूत सुविधाएं
योगी सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। गौ-आश्रय स्थलों पर गोवंश के लिए शेड, स्वच्छ भोजन एवं पेयजल की व्यवस्था, खड़ंजा, भूसा भंडार गृह, उपचार कक्ष, प्रकाश और सोलर लाइट जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ और व्यवस्थित ढंग से विकसित किया जा रहा है।

20 जनपदों में स्थापित निगरानी कंट्रोल रूम
पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि गौ-आश्रय स्थलों की बेहतर निगरानी एवं व्यवस्था के समन्वय के लिए राज्य के 20 जनपदों के विकास भवनों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। हरदोई, आगरा, जालौन, झांसी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, जौनपुर, अयोध्या, आजमगढ़, पीलीभीत, कौशांबी, शामली, बस्ती, अंबेडकरनगर, बलिया, एटा, अमरोहा, फर्रुखाबाद और चंदौली में ये कंट्रोल रूम कार्यरत हैं। शेष जनपदों में भी चरणबद्ध ढंग से यह व्यवस्था सुदृढ़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि निगरानी तंत्र मजबूत होने से गौवंश की देखभाल अधिक व्यवस्थित और जिम्मेदाराना ढंग से हो रही है। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो रही है।

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ठंड से किसी गोवंश की मृत्यु न हो
गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के साथ-साथ ठंड से सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्थलों पर हरा चारा, तिरपाल, काउ-कोट, अलाव, औषधियां, उपचार सुविधा और पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ठंड अथवा अव्यवस्था के कारण किसी भी गोवंश की मृत्यु न हो।