डीयू-यूजीसी विवाद पर यूट्यूबर मेघा की सफाई, बोलीं- रुचि के समर्थन में लगाए नारे, किसी संगठन से नहीं जुड़ी

नई दिल्ली
डीयू में हुए विवादित घटनाक्रम के बाद वायरल वीडियो को लेकर यूट्यूबर मेघा ने अपना पक्ष रखा है। मेघा ने कहा कि उन्होंने 'ब्रह्मणवाद जिंदाबाद' का नारा अपनी पत्रकार मित्र रुचि तिवारी के समर्थन में लगाया था, जिसे निशाना बनाया गया। मेघा ने स्पष्ट किया कि उनका किसी छात्र संगठन से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने जातियों से ऊपर उठकर हिंदू एकता बनाए रखने की अपील की। मेघा के अनुसार पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पेशे से पत्रकार उनकी मित्र रुचि तिवारी डीयू इलाके में मौजूद थीं। उसी दौरान जेएनयू के कुछ छात्र वहां यूजीसी के समर्थन में प्रदर्शन करने पहुंचे। मेघा ने कहा कि प्रदर्शन करना किसी का अधिकार है, लेकिन आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी मित्र से उनका सरनेम, जाति और गोत्र पूछे और ब्राह्मण होने के कारण उन्हें निशाना बनाया।
मेघा का दावा है कि उनकी मित्र के साथ सड़क पर बदसलूकी की गई, जिसके बाद वे लोग मॉरिस नगर थाने पहुंचे। पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया, लेकिन मेघा का कहना है कि सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान उनके समूह पर भी दबाव बनाया गया और उन्हें किनारे करने की कोशिश की गई।
मेघा ने कहा कि इसी स्थिति में उन्होंने ब्राह्मण समुदाय के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने बताया कि वे स्वयं ब्राह्मण नहीं हैं, लेकिन किसी भी समुदाय के साथ अन्याय होने पर उसके समर्थन में खड़े होना जरूरी है। मेघा ने लोगों से जाति के आधार पर विभाजन से बचने और धर्म के आधार पर एकजुट रहने की अपील की।
मेघा ने अपने बयान में एबीवीपी और डीयू से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके खिलाफ यह प्रचार कर रहे हैं कि वे एबीवीपी से जुड़ी हैं या डीयू की छात्रा हैं, जबकि वे एक स्वतंत्र रिपोर्टर हैं और चाहें तो अपना प्रेस कार्ड दिखा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आइसा के कुछ नेताओं द्वारा उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है। मेघा ने आरोप लगाया कि देश में जातियों के आधार पर समाज को बांटने का एक बड़ा एजेंडा चल रहा है। पिछले वर्षों में जो हिंदू एकता बनी थी, उसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र और वैश्य को 'चार भाई' बताते हुए एकजुट रहने का आह्वान किया।
मेघा ने जेएनयू की विचारधारा पर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि कुछ नारे और गतिविधियां देशविरोधी मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी सोच देश के लिए हानिकारक है और समाज में विभाजन पैदा करती है। यूजीसी से जुड़े मुद्दे पर बोलते हुए मेघा ने कहा कि यदि नई व्यवस्था लागू होती है तो जातिवाद बढ़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि सामाजिक विभाजन बढ़ने से समाज कमजोर होगा और बाहरी चुनौतियां मजबूत होंगी। मेघा ने सरकार से अन्य मुद्दों, जैसे जनसंख्या नियंत्रण, एंटी-कन्वर्जन कानून और अन्य नीतिगत मामलों पर भी ध्यान देने की बात कही। मेघा ने कहा कि लोगों को जाति के आधार पर नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे के रूप में एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी संगठन का समर्थन करना नहीं, बल्कि अपने मित्र के समर्थन में खड़ा होना और समाज में एकता का संदेश देना था।

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