यूपी में टीबी को लेकर अलर्ट, आधी आबादी में हो सकता है सुप्त संक्रमण

लखनऊ
प्रदेश की आधी आबादी लक्षणविहीन तपेदिक (टीबी) के जीवाणुओं के साथ सामान्य जीवन व्यतीत रहती है। इनमें से जिसकी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं। व्यक्ति टीबी ग्रसित हो जाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी की आशंका होते ही टीबी की जांच करायें।

सरकारी चिकित्सालयों में टीबी की मुफ्त जांच होती है। राष्ट्रीय टीबी प्रसार सर्वेक्षण में पाया गया कि बैक्टीरियोलाजिकल रूप से पाजिटिव टीबी के 52 प्रतिशत व्यक्तियों में लक्षण नहीं मिले, 17 प्रतिशत लोगों में लक्षण थे, लेकिन इलाज शुरू नहीं कराया था।

केजीएमयू के फेफड़ा रोग विशेषज्ञ प्रो.संतोष कुमार कहते हैं कि सुप्त टीबी संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति को खांसी नहीं आती है। उसके बुखार नहीं होता और वजन कम होने जैसी समस्या भी नहीं होती है। ऐसे लोग सामान्य जीवन जीते हैं। लेकिन मधुमेह, कुपोषण, एचआइवी, कैंसर, ध्रूमपान, मद्यपान के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई तो टीबी के ये निष्क्रिय जीवाणु सक्रिय होकर व्यक्ति को टीबी रोगी बना देते हैं।

See also  मनमाने ढंग से नहीं होगी गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पहले पुलिस और एजेंसियों को देना होगा लिखित कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का किसी सक्रिय टीबी मरीज से लंबे समय तक संपर्क रहा है या वह ऐसे समूह में आता है, जहां संक्रमण का खतरा है तो चिकित्सकीय सलाह पर जांच और आवश्यक होने पर टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) लिया जा सकता है। इससे भविष्य में सक्रिय टीबी होने का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीजों की पहचान, जांच और निःशुल्क उपचार के साथ उनके निकट संपर्क में रहने वाले लोगों की स्क्रीनिंग हो रही है। बच्चों, एचआइवी संक्रमित व्यक्तियों पर विशेष ध्यान है। ऐसे में बिना हिचक जांच करानी चाहिए। इससे सुप्त टीबी का संक्रमण सामने आएगा।

100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान में राज्य में 53,967 लक्षणविहीन टीबी मरीजों की पहचान हुई है। टीबी टास्क फोर्स के उप चेयरमैन डा. राजेंद्र प्रसाद के अनुसार टीबी उन्मूलन का लक्ष्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि छिपे संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक बनाना है।

See also  6 साल बाद जेल से बाहर आए शरजील इमाम, ‘छोटी आजादी’ पर जताई खुशी, सशर्त मिली राहत

यदि लोग सुप्त टीबी संक्रमण को समझें, जोखिम वाले समूह समय पर जांच कराएं और चिकित्सकीय सलाह का पालन करें तो देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में अहम कदम होगा।