कर्नाटक में बगावती सुर, क्या कांग्रेस में टूट होगी

:जिन्होंने लिंगायतों को जोड़ा, उन्हें मंत्री नहीं बनाया; डैमेज कंट्रोल नहीं किया तो मुश्किल

बेंगलुरु
‘मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में उन्हें मिलाकर कुल 34 मंत्री हैं। इस बार कांग्रेस के अनुभवी नेताओं को चुना गया है। हम अभी-अभी पार्टी में आए हैं। राजनीति में धैर्य होना चाहिए। अगर ये दोनों चीजें हैं, तो कोई भी राजनीति कर सकता है। हालांकि मुझे उम्मीद थी। राजनीति में कोई साधु या संन्यासी नहीं होता। हर किसी की इच्छा मंत्री, डिप्टी CM या CM बनने की होती है।
ये दर्द कर्नाटक के पूर्व डिप्टी CM लक्ष्मण सावदी का है, जो कर्नाटक में मंत्रियों की शपथ के बाद 29 मई को सामने आया। कर्नाटक सरकार में 34 ही मंत्री बनाए जा सकते हैं, यानी सिद्धारमैया की कैबिनेट में नए विधायकों के लिए जगह नहीं है। यही वजह है कि कई नेताओं में गुस्सा है।
27 मई को CM सिद्धारमैया ने 24 नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया था। इससे पहले 22 मई को CM सिद्धारमैया, डिप्टी CM डीके शिवकुमार के साथ 8 मंत्रियों ने शपथ ली थी।
27 मई को CM सिद्धारमैया ने 24 नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया था। इससे पहले 22 मई को CM सिद्धारमैया, डिप्टी CM डीके शिवकुमार के साथ 8 मंत्रियों ने शपथ ली थी।
लक्ष्मण सावदी लिंगायत कम्युनिटी से आते हैं। वे चुनाव से पहले BJP से कांग्रेस में आए थे। बेलगावी की अथानी सीट से चुनाव लड़ा और 75 हजार वोट से जीते। लक्ष्मण सावदी BJP की सरकार में 20 अगस्त 2019 से 28 जुलाई 2021 तक डिप्टी CM रहे हैं। लिंगायत कम्युनिटी में उनकी अच्छी पैठ है।
इस बार टिकट कटने के बाद लक्ष्मण सावदी कांग्रेस जॉइन कर रहे थे, तब बीएस येदियुरप्पा समेत BJP के बड़़े नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वे नहीं माने। तब BJP ने कहा लक्ष्मण सावदी के पार्टी छोड़ने का कोई असर नहीं होगा, पर नतीजे इस दावे के उलट रहे।

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