विनेश फोगाट केस्वागत में 125 किमी 13 घंटे तक का रोड शो, कहा अभी लड़ाई ख़त्म नहीं हुई, आगे भी रहेगी जारी

Paris Olympics 2024 में कुश्ती के फाइनल मैच से पहले अयोग्य घोषित होने वाली स्टार पहलवान विनेश फोगाट शनिवार की सुबह भारत लौट चुकी हैं। उनके स्वागत में हजारों की संख्या में फैंस दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे। दिल्ली एयरपोर्ट से अपने घर यानी कि हरियाणा के दादरी जिला के बलाली गांव तक करीब 125 किलोमीटर विनेश फोगाट रोड शो करते हुए गईं। इस दौरान जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। रास्ते में विनेश फोगाट कई बार भावुक हुईं, जिसपर उनके साथी पहलवानों ने उन्हें संभाला। घर पहुंचने के बाद विनेश फोगाट ने फिर से पेरिस ओलंपिक-2024 को लेकर अपनी बात कही।

गांव पहुंचने पर बिगड़ गई तबियत

दिल्ली एयरपोर्ट से विनेश फोगाट को अपने पैतृक गांव बलाली पहुंचने में करीब 13 घंटे लग गए। गांव पहुंचने पर सबसे पहले उन्होंने हनुमान मंदिर में दर्शन किए, इसके बाद गांव के खेल स्टेडियम में विनेश फोगाट को सम्मानित किया गया। इस दौरान विनेश फोगाट की तबियत बिगड़ गई। विनेश फोगाट ने कुर्सी पर बैठकर लोगों का आभार जताया। इस दौरान उन्होंने पेरिस ओलंपिक-2024 के फाइनल मैच को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

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क्या बोलीं विनेश फोगाट 

विनेश फोगाट ने गांव पहुंचकर अपने लोगों का आभार जताते हुए कहा कि ‘मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं, मैंने ऐसे गांव में जन्म लिया है। आज मैं गांव का कर्ज अदा करने में अपनी भूमिका निभा पाई हूं। मैं चाहती हूं कि गांव से मेरी एक बहन निकले जो मेरे रेसलिंग के सारे रिकॉर्ड को तोड़े। ओलिंपिक मेडल का घाव बहुत गहरा है। इससे उबरने में समय लगेगा। लेकिन, गांव और देश का जो प्यार देखा, इससे घाव भरने में हिम्मत मिलेगी। कुश्ती को मैं छोड़ना चाहती थी, या छोड़ दिया है, वह इस पर कुछ नहीं कह सकती हैं। लेकिन वह 2032 तक अपने खेल को जारी रखना चाहती थीं। जिंदगी की लड़ाई बहुत लंबी है। हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। एक छोटा सा हिस्सा मैं पार कर आई हूं। यह भी अधूरा रह गया। हम एक साल से लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं, वह आगे भी जारी रहेगी।’

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एयरपोर्ट पर रो पड़ीं विनेश

दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर आने के बाद विनेश के स्वागत में हजारों लोग खड़े थे। प्रशंसकों की भीड़ में विनेश के दोस्त बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक भी एयरपोर्ट पर मौजूद थीं। दोस्तों को देखकर विनेश भावुक हो उठीं और फफक-फफक कर रोने लगीं।

 

विनेश फोगाट ने गांव पहुंचकर अपने लोगों का आभार जताते हुए कहा कि ‘मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं, मैंने ऐसे गांव में जन्म लिया है। आज मैं गांव का कर्ज अदा करने में अपनी भूमिका निभा पाई हूं। मैं चाहती हूं कि गांव से मेरी एक बहन निकले जो मेरे रेसलिंग के सारे रिकॉर्ड को तोड़े। ओलिंपिक मेडल का घाव बहुत गहरा है। इससे उबरने में समय लगेगा। लेकिन, गांव और देश का जो प्यार देखा, इससे घाव भरने में हिम्मत मिलेगी। कुश्ती को मैं छोड़ना चाहती थी, या छोड़ दिया है, वह इस पर कुछ नहीं कह सकती हैं। लेकिन वह 2032 तक अपने खेल को जारी रखना चाहती थीं। जिंदगी की लड़ाई बहुत लंबी है। हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। एक छोटा सा हिस्सा मैं पार कर आई हूं। यह भी अधूरा रह गया। हम एक साल से लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं, वह आगे भी जारी रहेगी।’

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पति ने फिर निकाली भड़ास 

विनेश फोगाट के पति सोमवीर राठी ने फिर से अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने गांव पहुंचकर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि हमसे अब कुश्ती नहीं हो पाएगी। हमारे साथ कोई भी खड़ा नहीं था। हम अंदर से पूरी तरह से टूट चुके हैं। वह नहीं चाहते कि विनेश फोगाट संन्यास वापस लेने का फैसला करें।