मध्य प्रदेश में हर महीने 25 किसान आंदोलन, मोहन सरकार के दो साल में 600 से ज्यादा प्रदर्शन, सागर जिला सबसे आगे

भोपाल 

मध्य प्रदेश सरकार इस साल यानी 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है। सरकार का फोकस खेती की लागत घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर है। दूसरी तरफ, प्रदेश में हर महीने औसतन 25 किसान आंदोलन हो रहे हैं।

विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने पूछा कि 1 जनवरी 2024 से लेकर फरवरी 2026 तक भोपाल सहित मध्य प्रदेश में कितने आंदोलन हुए? इन आंदोलनों में पुलिस से झड़प में कितने किसानों की मौतें हुईं? कितने किसान घायल हुए? इन आंदोलनों के दौरान कितने किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए? इनमें से कितने मामलों में खात्मा लगाया गया?इसके जवाब में गृह विभाग की ओर से बताया गया कि जनवरी 2024 से फरवरी 2026 तक प्रदेशभर में करीब 609 किसान आंदोलन हुए हैं।

खरगोन जिले में किसानों के 61 आंदोलन

मोहन सरकार के कार्यकाल में सागर जिले में सबसे ज्यादा किसानों के 76 आंदोलन और प्रदर्शन हुए हैं। दूसरे नंबर पर खरगोन जिले में 61 आंदोलन हुए। ग्वालियर जिले में 44, नरसिंहपुर, खंडवा और रीवा में 38-38 आंदोलन हुए। जबलपुर से सटे कटनी जिले में दो साल में 35 किसान आंदोलन हुए हैं।

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आंदोलन करने में RSS का सहयोगी संगठन सबसे आगे

प्रदेश में दो साल में सबसे ज्यादा किसान आंदोलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ ने किए। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा सहित तमाम किसान संगठनों ने आंदोलन धरना, प्रदर्शन किए। इन्हीं दो साल में मध्य प्रदेश कांग्रेस और किसान कांग्रेस ने करीब 37 आंदोलन किए हैं।

3 महीने में दो बार किसानों के सामने झुकी सरकार

हाल ही में मोहन सरकार किसानों के सामने दो बार झुक चुकी है। पहली बार उज्जैन सिंहस्थ के लिए जमीन अधिग्रहण मामले में सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट वापस लिया था। इसके बाद उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर रोड की ऊंचाई कम करने का फैसला लेना पड़ा। दोनों ही मामले में किसानों के विरोध और दबाव के बाद सरकार को कदम वापस लेने पड़े।

इन जिलों में इन वजहों से हुए आंदोलन

भाजपा से जुड़े किसान संगठनों द्वारा सीहोर, हरदा, विदिशा, देवास और राजगढ़ जिलों में गेहूं-धान की खरीदी में देरी, समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद, भुगतान लंबित रहने, बारदाना और तौल व्यवस्था की समस्याओं को लेकर आंदोलन किए गए। कई जगह किसानों ने 2700 से 3100 रुपए समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग उठाई।

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नर्मदापुरम और बैतूल जिलों में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से फसल नुकसान के बाद बीमा राशि और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों में प्याज, लहसुन और सोयाबीन के दाम गिरने के साथ मंडी व्यवस्था की समस्याओं को लेकर आंदोलन किए गए।

वहीं, छतरपुर, टीकमगढ़ और बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों में सिंचाई, नहरों में पानी और बिजली आपूर्ति की समस्याओं को लेकर किसान सड़कों पर उतरे। जबकि शाजापुर और आगर-मालवा जिलों में खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था और तौल में गड़बड़ी के विरोध में आंदोलन हुए।

कांग्रेस के इन मुद्दों पर किसान आंदोलन

कांग्रेस और उसके संगठनों द्वारा मंदसौर, शाजापुर और उज्जैन जिलों में किसानों का कर्ज माफ करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए गए।

सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में सोयाबीन-गेहूं के दाम और खरीदी की समस्याओं को लेकर आंदोलन हुए। छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में आदिवासी किसानों की जमीन, मुआवजा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन हुए।

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ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सिंचाई के पानी, बिजली बिल और खाद-बीज संकट को लेकर किसान आंदोलनों का आयोजन किया गया। वहीं, भोपाल और सीहोर जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से नुकसान के बाद राहत और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।