Johar36garh | छत्तीसगढ़ दुर्ग के मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के नोटिफिकेशन में 2015, 2016, 2017 वर्ष के लिए चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज की मान्यता का उल्लेख नहीं किया है, जिससे वहां अध्ययनरत 467 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। इससे पहले भी मान्यता रद्द करने के कारण एमबीबीएस पास कर चुके छात्रों की डिग्री पर खतरा आया था। कुछ इंटर्नशिप कर रहे थे और कुछ इंटर्नशिप करने वाले थे। लेकिन तब हास्पिटल बोर्ड रायपुर के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने अथक प्रयास किए थे और उन बच्चों को राहत दिलाई थी। उसी समय चंदूलाल मेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर उठ रहे सवालों को देखते हुए छात्रों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी बात की थी और भूपेश बघेल ने तब उन्हें आश्वस्त किया था कि उनके भविष्य पर कोई खतरा नहीं आने दिया जाएगा। एक बार फिर हास्पिटल बोर्ड ने अपना हंटर चला दिया है। इसके जद में 467 बच्चे आ गए हैं। आईएमए के अध्यक्ष डॉ.राकेश गुप्ता ने कहा है सरकार को इस मामले में तत्काल पहल कर बच्चों भविष्य सुरक्षित करना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि 467 छात्रों को अंबिकापुर छोड़कर राज्य के 6 मेडिकल कॉलेजों में वर्ष रिलोकेट किया जाए। सुभारती मेडिकल कॉलेज देहरादून में इसी प्रकार के केस का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य सरकार के वकीलों से यह सहमति ली थी कि इस प्रकार की स्थिति आने से अन्य मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को एक निश्चित अनुपात में भर्ती किया जाएगा।
