एक्सप्रेस-वे पर आग का गोला बनी चलती बस, 9 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत, खिड़की से बाहर कूदकर यात्रियों ने बचाई जान

यमुना एक्सप्रेसवे पर एक भीषण हादसा सामने आया है। बुधवार की रात एक चलती स्लीपर एसी बस में आग लग गई। हादसे में 9 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई है। कई यात्रियों ने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई। बस यात्रियों को लेकर नोएडा से महोबा जा रही थी। जेवर कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब 12:00 बजे दयानतपुर गांव के समीप हुआ।

 

 

एक्सप्रेस-वे पर चलती बस आग का गोला बन ग

ई। बस में आग लगने पर चीख पुकार मच गई। 9 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि कुछ लोगों ने खिड़की से बाहर कूद कर अपनी जान बचाई। हादसे की सूचना पर दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंची। करीब 45 मिनट में आग बुझाई गई, लेकिन बस तब तक पूरी तरह जल चुकी थी। यह बस राज कल्पना ट्रैवल्स की बताई जा रही है।

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अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में बुधवार देर रात भीषण आग लगने से एक महिला समेत 9 लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 26 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बस में करीब 35 यात्री सवार थे। बस कश्मीरी गेट से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी तभी ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में अचानक आग लग गयी। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद बस में धुआं भर गया और कुछ यात्री बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत ठीक बताई जा रही है।

 

 

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उन्होंने बताया कि घटना के समय कुछ यात्री सो रहे थे। दमकल, पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। बस के शीशे तोड़ने के साथ गैस कटर की मदद से उसके हिस्से काटकर फंसे यात्रियों और शवों को बाहर निकाला गया। कुछ मृतकों की पहचान हो गई है, जबकि अन्य की पहचान की जा रही है। पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है और सभी मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों को सूचना देने का प्रयास किया जा रहा है।

 

एक महिला यात्री ने बताया कि मैं सो रही थी तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया। जब मैं जागी तो वहां पहले से ही बहुत भीड़ थी। मैंने अपना कोई सामान नहीं उठाया। यहां तक कि जूते भी नहीं पहने। बस अपना फोन लिया और बाहर निकल आया। इतनी भीड़ थी कि लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। मुझे भी धक्के लगे और आखिरकार किसी ने मुझे बाहर खींच लिया। उसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं। चारों तरफ धुआं ही धुआं था। अफरा-तफरी मची हुई थी और बाहर निकलना बहुत मुश्किल था। इतना धुआं था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। लोग अंदर दम घुटने से परेशान थे। महिला यात्री ने बताया कि बहुत कम लोग ही बच पाए। सिर्फ वही जो धक्का-मुक्की के बीच रास्ता बनाकर निकल सके।

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