एमपी में खतरनाक वायरस की वापसी, डिंडोरी में बच्चे की मौत से मचा हड़कंप

भोपाल 
एमपी में एक बार फिर खतरनाक वायरस की दहशत है। प्रदेश के डिंडोरी में इससे एक बच्चे की मौत हो गई। बच्चे में वायरस की पुष्टि होने के बाद हलचल मच गई है। प्रदेश के डिंडोरी में यह मौत हुई। यहां जानलेवा ‘जीका’ वायरस की एंट्री हो गई जिसने जिले के अमरपुर ब्लाक के बहेरा गांव के 6 साल के एक बच्चे की जान ले ली। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में मौत की वजह जापानी इंसेफेलाइटिस बताई गई जिसके बाद प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं अलर्ट पर हैं। तेज बुखार, दर्द और मस्तिष्क सहित शरीर में सूजन लाने वाला यह वायरस बेहद खतरनाक है। डिंडोरी में जीका वायरस से यह पहली मौत है।

जबलपुर स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की रिपोर्ट में बहेरा के 6 वर्षीय अजय गौतम की मौत जापानी इंसेफेलाइटिस से होने की पुष्टि की गई। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य का स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड पर आ गया। इधर अमरपुर बीएमओ एसएस मरकाम सहित मलेरिया विभाग की टीम बहेरा पहुंची है। मृत बालक के परिजनों से बीमारी के संबंध में जानकारी ली और गांव में पानी आदि की जांच भी की।

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अजय के पिता संतोष गौतम व मां सुनैना ने बताया कि 21-22 दिन पहले अजय खेलते-खेलते गिर पड़ा था जिसके बाद उसके पैर में सूजन आ गई थी। बाद में हालत बिगड़ गई। 31 जुलाई को उसे तेज बुखार आया जिसके बाद डॉक्टरों को दिखाया। उसका पैर काला पड़ गया और मवाद भी बनने लगा तब अजय को 2 अगस्त को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जबलपुर की आईसीएमआर की लैब में हुई जांच की रिपोर्ट में अजय के जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से संक्रमित होने की बात सामने आई है।
 
बड़ी बहन की भी बिगड़ी तबियत
अजय की मौत के बाद उसकी बड़ी बहन मधु को भी बुखार आ रहा है। मलेरिया अधिकारियों के अनुसार उसे दो दिन से लगातार बुखार आ रहा है। मधु को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार उसका बुखार सामान्य लग रहा है क्योंकि सूजन जैसे कोई लक्षण नहीं हैं।

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जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण
जीका वायरस मच्छरों से मनुष्यों में फैलता है। चिकित्सकों के अनुसार मामूली लक्षण के रूप में बुखार और सिरदर्द होता है। ज्यादा गंभीर रूप लेने पर मस्तिष्क में सूजन इंसेफेलाइटिस का कारण बन सकती है, जिससे प्रभावित मरीज को दौरे पड सकते हैं, वह कोमा में जा सकता है या फिर उसकी मृत्यु हो सकती है। जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे अच्छा उपाय है।

जीका वायरस के मामले पहले भी सामने आ चुके
बता दें कि मध्यप्रदेश जीका वायरस के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। 2018 में तो प्रदेश में 127 मामले, आरटी-पीसीआर (RT-PCR) टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे।