12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में अदृश्य, लेकिन सूतक काल रहेगा प्रभावी

12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा इसलिए अनेक शुभ/अशुभ विधान उसी के अनुरूप होंगे। चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं दे रही, इसलिए सूतक काल का पालन अनिवार्य नहीं माना जाता पर धार्मिक विचार से सावधानी बरतना शुभ माना जाता है।

पूजन एवं मंगल कर्म
ग्रहण समाप्ति के बाद सूर्यदेव, भगवान विष्णु व गणेश जी की आराधना करें। दीपक जलाएं, धूप दें और ॐ सूर्याय नमः, ॐ नमो भगवते विष्णवे जैसे मंत्रों का उच्चारण करें। दान करें जैसे गरीबों को भोजन देना, वस्त्र दान करना।

स्वच्छता एवं पुनर्स्थापना
ग्रहण के बाद घर एवं मंदिरों में सफाई एवं शुद्धिकरण करें। पूजा-मंडप, मंदिर परिसर या अपने पूजा स्थान को विशेष रूप से धोएं, धूप दें और गंगाजल से शुद्ध करें।

अभीष्ट कार्यों की आरंभ
ग्रहण समाप्ति के बाद शुभ कार्य जैसे ओरछना, नामकरण, गृह प्रवेश आदि आरंभ करना शुभ माना जाता है। नए व्यापार या निवेश के लिए समय अनुकूल हो सकता है पर ग्रहण समय में शुरू किये गए कार्यों से कुछ बाधा आ सकती है।

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गृह वास्तु और मनोदशा
ग्रहण के समय घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें, भोजन न पकाएं। ग्रहण बाद घर की वातावरण को सकारात्मक बनाएं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को विश्रांति व आराधना में आवश्यक रूप से शामिल करें।

12 अगस्त 2026 को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल का प्रभाव भारतीय स्थिति में बहुत सीमित है। फिर भी धार्मिक दृष्टि से इस समय का शुद्धि-पुनर्स्थापना का अवसर माना जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद शुभ कार्य करें पूजन-दान, शुद्धि, शुभ आरंभ तो इसका सकारात्मक फल प्राप्त हो सकता है।