पुरुषों में बार-बार पेशाब आना हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत, न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली
अगर किसी पुरुष को बार-बार पेशाब आने की समस्या हो रही है और वह इसे बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर रहा है, तो यह लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, खासतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में यह प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इलाज जटिल हो सकता है।

शुरुआती दौर में नहीं दिखते साफ लक्षण
प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर साफ नजर नहीं आते। कई मामलों में बीमारी बिना किसी खास परेशानी के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। यही कारण है कि थोड़ी-सी भी शंका होने पर जांच कराना जरूरी माना जाता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बार-बार पेशाब आना, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब शुरू या बंद करने में दिक्कत और यह महसूस होना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ—इन संकेतों को अक्सर लोग सामान्य बुढ़ापे से जोड़ देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।

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खून आना हो सकता है गंभीर संकेत
पेशाब या वीर्य (स्पर्म) में खून आना एक गंभीर लक्षण है, जिसे किसी भी हालत में हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई पुरुष इसे अस्थायी समस्या मानकर टाल देते हैं, जबकि यह कैंसर की ओर इशारा कर सकता है।
 
मिलते-जुलते लक्षण, लेकिन फर्क समझना जरूरी
प्रोस्टेट बढ़ने (BPH), यूरिन इंफेक्शन और प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। फर्क यह है कि इंफेक्शन में जलन, बुखार या पेशाब में बदबू हो सकती है। BPH में आमतौर पर खून नहीं आता, जबकि कैंसर में समय के साथ लक्षण लगातार गंभीर होते जाते हैं।

देर से दिखने वाले संकेत
कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो अक्सर नजर से छूट जाते हैं, जैसे कूल्हे या कमर में लगातार दर्द, बिना वजह वजन कम होना और हमेशा थकान महसूस होना। ये संकेत आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है।

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किन लोगों में ज्यादा खतरा
प्रोस्टेट कैंसर के सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन उम्र, जेनेटिक कारण और हार्मोनल बदलाव इसकी अहम वजह माने जाते हैं। इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान, शराब और खराब जीवनशैली भी जोखिम बढ़ा सकती है।

जांच ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों की सलाह है कि 50 साल की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित जांच जरूर करानी चाहिए, चाहे कोई लक्षण हों या नहीं। अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, तो जांच और भी पहले शुरू करनी चाहिए। समय पर जांच और सतर्कता से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।