स्लॉटर हाउस कांड: दुधारू भैंसों को काटने का चौंकाने वाला सच, बछड़े और पाड़ों के अवशेष मिले

भोपाल 

 स्लॉटर हाउस में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध कटाई का मामला गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार स्लॉटर हाउस में 14-15 साल की निर्धारित उम्र के बजाय 4 से 8 साल के दुधारू और स्वस्थ भैंसों को काटा जा रहा है। यहां छोटे-छोटे बछड़ों और पाड़ों के अवशेष के साक्ष्य मिले हैं।

26 टन गौ मांस से भरा मिला था ट्रक

बता दें कि पीएचक्यू (PHQ) के सामने 26 टन गोमांस से भरा ट्रक मिला था। इस मांस को स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजने का सर्टिफिकेट नगर निगम ने जारी किया था। निगम के डॉक्टर ने इस मांस को भैंस का बताते हुए इंसानों के उपभोग के लिए फिट माना था।

 पड़ताल में सामने आया कि स्लॉटर हाउस में रोज 100 से 150 पशुओं का वध किया जा रहा था। वहीं, निगम के रिकॉर्ड में ह संख्या औसतन 40 भैंसों की थी। 22 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी ने भास्कर से बातचीत में खुद स्वीकारा था कि रोज 100 से 150 पशुओं की स्लॉटिंग हो रही है। यानी निगम के रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन में 3 गुना से ज्यादा का अंतर था।स्लॉटर हाउस से मांस मुंबई और चेन्नई के रास्ते दुबई समेत खाड़ी देशों तक एक्सपोर्ट किया जा रहा था।

हालांकि, नगर निगम प्रशासन को इस सप्लाई चैन की कोई जानकारी नहीं थी। एमआईसी सदस्य (हेल्थ और एसबीएम) आरके सिंह ने कहा, ‘निगम के रिकॉर्ड में हर दिन अधिकतम 40 भैंसों की स्लॉटिंग दर्ज है। मांस कहां और कितना भेजा जा रहा है, यह देखना हमारा काम नहीं है।’ निगम के डॉक्टर रोज दो बार स्लॉटर हाउस की जांच करते थे। शाम को पशुओं की मेडिकल जांच होती। इसके बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता। अगले दिन सप्लाई होने वाले मांस की गुणवत्ता की जांच होती थी।

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अब पुलिस रिपोर्ट की आड़ में मामला दबाने की कोशिश

    जिस 26 टन मांस को मुंबई भेजा गया, उसमें गोमांस की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद पूरा सिस्टम पुलिस की जांच रिपोर्ट की आड़ लेता दिख रहा है। पुलिस कह रही है कि सीसीटीवी फुटेज में सिर्फ भैंसें नजर आ रही हैं, जबकि निगम यह तर्क दे रहा है कि पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जांच होगी।

    पुलिस की जांच रिपोर्ट का मतलब है चार्जशीट, जिसमें कम से कम 3 महीने लगते हैं। यानी तब तक कार्रवाई टालने का रास्ता साफ। ऐसे में सवाल है कि किस रिपोर्ट का इंतजार है?

    जब पुलिस की पीएम रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

मेयर से बोले पार्षद- मान लिया कि सब नियम से हुआ, पर गोमांस का जवाब दें

गोमांस मामले में महापौर मालती राय अब एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्षों को मनाने में जुट गई हैं। उन्होंने सोमवर को एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्ष पार्षदों को इस मुद्दे पर निगम का साथ देने के लिए कहा। इस पर पार्षदों ने कहा कि माना सबकुछ नियम से हुआ, लेकिन गाय का मांस कैसे जस्टीफाई हो सकता है? इस पर तो जवाब देना ही होगा। अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हम तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं।

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नियमों को तिलांजलि: डॉक्टर और तकनीक फेल

1- फिटनेस रिपोर्ट का अभाव:

नियम है कि बिना पशु चिकित्सक की जांच और उम्र निर्धारण के किसी पशु को नहीं काटा जाएगा, लेकिन यहां बिना जांच के ही वध का खेल चल रहा था।

2- स्टनिंग और क्रूरता

आधुनिक मशीनों और सीसीटीवी की मौजूदगी के बावजूद पशुओं को बिना बेहोश किए और अनावश्यक पीड़ा देकर काटा जा रहा था।

3- अवैध ड्रेसिंग:

स्वास्थ्य मानकों के अनुसार जमीन पर मांस का संपर्क प्रतिबंधित है, लेकिन सबूत बताते हैं कि यहां स्वच्छता के मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सवालों से भाग रहे अधिकारी

1- डॉ. बीपी गौर (पशु चिकित्सक):

विवादित सर्टिफिकेट जारी करने के बाद से डॉक्टर ने चुप्पी साध ली है। वे न फोन उठा रहे हैं और न ही दफ्तर में मिल रहे हैं।

2- हर्षित तिवारी (अपर आयुक्त):

पशु संबंधी कामकाज संभालने वाले अपर आयुक्त ने सवालों पर फोन काट दिया। स्लॉटर हाउस की नियमावली इनके पास नहीं है।

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3- संस्कृति जैन (निगम आयुक्त):

भोपाल शहर की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को स्लॉटर हाउस के संचालन की बुनियादी प्रक्रिया तक की जानकारी नहीं है, जिससे प्रबंधन की पोल खुल गई है।

असलम पर मेहरबान निगम, 100 करोड़ की जमीन 4 लाख में दी

यह मॉडर्न स्लॉटर हाउस करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बना है, जिसकी बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। निगम ने यह जमीन कंपनी को सालाना सिर्फ 4 लाख रुपए किराये पर दी थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिसर में बाहरी लोगों की एंट्री प्रतिबंधित थी। संचालन का पूरा नियंत्रण असलम कुरैशी के पास था। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग भी निगम के बजाय संचालक के पास थी।

गोमांस की पुष्टि होते ही तुरंत स्लॉटर हाउस सील कर दिया। आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के बाद की जाएगी।’ -मालती राय, मेयर ( नगर निगम भोपाल)

गोमांस मामले में आरोपियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। मामले में सख्त कार्रवाई हो।’ -विश्वास सारंग, कैबिनेट मंत्री