Italy का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाया, महंगाई से जनता को राहत

मुंबई
ग्लोबल लेवल पर बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच इटली सरकार ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है। यह फैसला मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा लागत के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

फ्यूल महंगा होने पर सरकार का एक्शन
इटली के उप प्रधानमंत्री माटेओ साल्विनी ने बताया कि हाल के हफ्तों में ग्लोबल ऑयल प्राइस में आई तेजी का सीधा असर देश के नागरिकों पर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कर में राहत देने का फैसला किया है, ताकि आम लोगों के खर्च का बोझ कम किया जा सके। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है , जब ऊर्जा कीमतों में उछाल ने पूरे यूरोप में महंगाई को बढ़ा दिया है।

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कैबिनेट बैठक में राहत पैकेज पर चर्चा
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सैकड़ों करोड़ यूरो के राहत पैकेज पर विचार किया गया। यह पैकेज सीमित समय के लिए लागू किया जाएगा और इसका मकसद परिवारों और उपभोक्ताओं को ऊर्जा लागत के झटके से बचाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम घरेलू खर्च को नियंत्रित करने और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद करेगा।

तेल कंपनियों से कीमतें नियंत्रित रखने की अपील
सरकार ने कर कटौती के साथ-साथ तेल कंपनियों से भी सहयोग मांगा है। उप प्रधानमंत्री साल्विनी ने बताया कि सरकार ने डीजल के लिए अधिकतम कीमत करीब 1.90 यूरो (करीब ₹203.28) प्रति लीटर तय करने का सुझाव दिया है, ताकि बाजार में अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोका जा सके। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कर राहत का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

ईंधन कीमतों में क्यों आया उछाल?
मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आई है।
इटली के उद्योग मंत्रालय के अनुसार यहां डीजल की औसत कीमत 2.10 यूरो प्रति लीटर और पेट्रोल 1.87 यूरो प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह स्तर आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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निगरानी और सट्टेबाजी पर नजर
सरकार ने फ्यूल सप्लाई चेन पर निगरानी भी तेज कर दी है। एनी एसपीए और तमोइल इटालिया जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के साथ बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि कीमतों में बढ़ोतरी का कारण वास्तविक लागत हो, न कि सट्टेबाजी। इसके साथ ही सरकार कीमतों की नियमित समीक्षा कर रही है, ताकि किसी तरह की अनियमितता को रोका जा सके।

अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स की तैयारी
सरकार ऊर्जा कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। हालांकि, फिलहाल उम्मीद जताई जा रही है कि स्थिति नियंत्रण में रहेगी और इस कदम की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्यों ज्यादा प्रभावित है इटली?
इटली यूरोप के उन देशों में शामिल है जहां फ्यूल पर टैक्स पहले से ही ज्यादा है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो इसका असर यहां ज्यादा तेजी से दिखता है। यही वजह है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। कुल मिलाकर, इटली सरकार का यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच आम लोगों को राहत देने की दिशा में अहम कदम है। वैश्विक तनाव और महंगे तेल के दौर में ऐसे उपाय अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम महंगाई को काबू में रखने में सफल होता है या नहीं।

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