2606 लोकेशन पर बढ़ेगी प्रॉपर्टी गाइडलाइन दर, आसमान छुएंगे प्रॉपर्टी के दाम

भोपाल 

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले की नई कलेक्टर गाइडलाइन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को केंद्रीय मूल्यांकन समिति की भोपाल में हुई बैठक में इंदौर जिले की 2606 लोकेशन पर गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति बनी है। अब इसे शासन की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है।

90 लोकेशन पर गाइडलाइन दर बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति
इससे पहले जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में 267 दावे-आपत्तियों का निराकरण किया गया। इनमें से 11 मामले नियमों में बदलाव से जुड़े होने के कारण शासन स्तर पर भेजे गए हैं। आपत्तियों के परीक्षण के बाद 90 लोकेशन पर गाइडलाइन(Property Guideline) दर बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इनमें मुख्य रूप से कृषि भूमि की कीमतों में वृद्धि और विकसित हो रही कॉलोनियों के अनुरूप दर तय करने की मांग शामिल रही।

270 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में शामिल
इस बार गाइडलाइन में नई कॉलोनियों को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। पहले 198 कॉलोनियां जोड़ी गई थीं, जबकि दावे-आपत्तियों के बाद 72 और कॉलोनियों को शामिल किया गया। इस तरह 270 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में हैं, जिससे इन क्षेत्रों में रजिस्ट्री प्रक्रिया और पारदर्शी होगी।

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46 फीसदी क्षेत्रों में गाइडलाइन बढ़ेगी
मालूम हो, जिले में वर्तमान में 4840 लोकेशन पर संपत्तियों का पंजीयन होता है। इनमें से 2606 लोकेशन पर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है, यानी करीब 46 फीसदी क्षेत्रों में गाइडलाइन(Property Guideline) बढ़ेगी। प्रस्ताव के अनुसार, दरों में 10 से लेकर 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इनमें सबसे ज्यादा 1553 लोकेशन पर 21 से 51 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित है। करीब 115 लोकेशन पर गाइडलाइन दरों में 100 प्रतिशत से ज्यादा तो कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि 300 प्रतिशत तक पहुंच सकती है ।

क्या है कलेक्टर गाइडलाइन ?
कलेक्टर गाइडलाइन वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर सरकार जमीन या मकान की कीमत तय करती है। इससे कम कीमत पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती।

हर साल क्यों बढ़ती हैं दरें?
सरकार बाजार कीमतों के हिसाब से हर साल रिवीजन करती है, ताकि स्टाम्प ड्यूटी का सही मूल्य मिल सके और अंडरवैल्यू रजिस्ट्री रोकी जा सके।

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इस बार बढ़ोतरी ज्यादा क्यों?

    कई इलाकों में लंबे समय से रेट नहीं बढ़े थे
    रियल एस्टेट में तेजी और डेवलपमेंट (नई सड़कें, प्रोजेक्ट)
    शहरी इलाकों में डिमांड बढ़ना
    आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
    जमीन/मकान खरीदना महंगा होगा
    स्टाम्प और रजिस्ट्री शुल्क बढ़ जाएगा
    पुराने एग्रीमेंट वाले खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।